प्रयागराज। अपचारी अधिकारी का प्रमाण पत्र जारी होने के बाद कार्रवाई को दरकिनार कर मुख्य अभियंता हिमांशु मित्तल के अधिकार क्षेत्र का दायरा बढ़ा दिया गया है। बरेली व आगरा में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता का आरोप सिद्ध होने के बाद हाल में ही इनको भष्ट अफसर के रूप में प्रमाण पत्र जारी किया गया था। इस बीच इन पर लगे आरोपों की अनदेखी करते हुए ईनाम के तौर पर चित्रकूट धाम(बांदा) क्षेत्र के मुख्य अभियंता का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। इससे योगी आदित्यनाथ सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति को झटका लगने की बात कही जा रही है।
वर्ष 2015-16 में बरेली में तैनाती के दौरान सड़कों के अनुबंध गठन, वित्तीय स्वीकृति व सड़कों के निर्माण में मुख्य अभियंता हिमांशु मित्तल की ओर व्यापक अनियमितता बरतने का मामला पकड़ा गया है। इस मामले में महालेखाकार जनरल एंड सोशल सेक्टर आडिट की रिपोर्ट में भी 1.44 अरब रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता पकड़ी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई के लिए पत्रावली राजभवन भेजी गई है।
विज्ञापन
इस बीच कार्रवाई की बात तो दूर मित्तल केकार्यक्षेत्र का दायरा बढ़ा दिया गया है। बीती 19 जुलाई की दोपहर मित्तल को प्रयागराज के साथ ही चित्रकूट धाम के मुख्य अभियंता का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया। वहां मुख्य अभियंता का प्रभार देख रहे एसके गोयल को हटाकर मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई। इसे लेकर अंदरखाने हड़कंप मचा हुआ है और जिम्मेदार अफसर टिप्पणी करने से बच रहे हैं।मित्तल को ईनाम केतौर पर चित्रकूट धाम का अतिरिक्त प्रभार प्रमुख अभियंता(व्यवस्थापन) क वर्ग वीके सिंह के निर्देश पर दिया गया।
कोट
भ्रष्ट अफसरों के लिए इस सरकार में कोई जगह नहीं है। मुख्य अभियंता के विरुद्ध भ्रष्टाचार से संबंधित जांच रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी। भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारी जेल जाएंगे। नितिन रमेश गोकर्ण, प्रमुख सचिव- पीडब्ल्यूडी, लखनऊ।