हाईकोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 34(1) के तहत हर सरकारी संस्थान में दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए कम से कम चार प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इसमें विशिष्ट दिव्यांगता को भी एक प्रतिशत आरक्षण वाली श्रेणी में शामिल किया गया है। ऐसे में 30 जुलाई 2021 का शासनादेश अधिकार क्षेत्र से बाहर जारी किया गया था। कोर्ट ने माना कि विशिष्ट दिव्यांगता की श्रेणी को हटाने और फिर 30 सितंबर 2024 को बहाल करने के पीछे कोई उचित कारण या तर्क नहीं था। यह सरकार की गलती थी और उसका नुकसान याचियों को नहीं उठाना चाहिए।