इलाहाबाद। आशंकाओं और अटकलों के बीच रविवार को पीसीएस-2015 प्री के पहले पेपर की परीक्षा हुई। केंद्रों पर परीक्षा से अधिक गोरखपुर में ट्रांसपोर्ट कंपनी के दफ्तर में पेपर का बंडल रखने तथा कूरियर से प्रश्नपत्र भेजे जाने की चर्चा रही। अभ्यर्थियों का कहना था कि यह पेपर भी आउट हुआ है। कहीं से स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने की वजह से उनकी आशंकाओं को और बल मिलता।
पेपर लीक होने की वजह से 29 मार्च को हुई पहले पेपर की परीक्षा निरस्त हो गई थी। रविवार को दोबारा हुई परीक्षा भी विवादाें से अछूती नहीं रही। नई व्यवस्था के तहत आयोग की परीक्षाओं के सेंटर दूसरे जिलों में बनाए जाते हैं। ऐसे में अभ्यर्थी एक दिन पहले ही संबंधित जिलों के लिए रवाना हो गए थे लेकिन सुबह अखबार देखने पर उन्हें निराशा हुई। गोरखपुर से ही यहां परीक्षा देने आए राहुल चौरसिया का कहना था कि ऐसा पहली बार सुनने को मिल रहा है कि कूरियर या किसी प्राइवेट एजेंसी के भरोसे पेपर जिलों में भेजा गया।
वहीं से आए अमित चक्रवर्ती का कहना था कि इससे साफ है कि आयोग में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा। हालांकि पेपर स्तरीय रहा। अभ्यर्थियों का कहना था कि सभी खंड से सवाल थे। विशेषज्ञ रनीश जैन का कहना था कि विगत कई वर्षों बाद ऐसा पेपर आया। इससे पढ़ने वालों को फायदा मिलेगा।
पीसीएस-2015 प्रारंभिक परीक्षा में लगातार गड़बड़ियों से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो गया है। पेपर के बंडल एक ट्रांसपोर्ट एजेंसी के दफ्तर में पहुंच जाते हैं लेकिन आयोग की ओर से इसकी जांच कराना तो दूर अफसर जवाबदेही तक से बच रहे हैं। स्थिति यह है कि परीक्षा संबंधी जानकारी देने वाला भी कोई नहीं है। या तो अफसरों ने मोबाइल ऑफ कर रखे हैं या उठा नहीं रहे।
अभ्यर्थियों की ओर से सबसे पहला सवाल तो आयोग से जिलों को पेपर जाने की व्यवस्था पर उठाया जा रहा हैै। नियमानुसार आयोग के प्रतिनिधि पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के बीच पेपर लेकर जाते हैं लेकिन गोरखपुर की घटना पर आयोग के अफसर जिस तरह से चुप्पी साधे हुए हैं, उससे स्पष्ट है कि पेपर ले जाने की पूरी व्यवस्था कूरियर के जिम्मे हैं। अभ्यर्थियों का यह भी सवाल रहा कि पेपर काफी देर तक लावारिस पड़ा रहा। इसकी भी जांच कराने की जरूरत नहीं समझी गई। परीक्षार्थियों ने रविवार को परीक्षा केंद्रों पर भी आयोग के पर्यवेक्षकों के समक्ष ये सवाल उठाए लेकिन कहीं से जवाब नहीं मिला। इसके विपरीत जवाबदेही से बचने के लिए परीक्षा नियंत्रक ने मोबाइल आफ कर रखा था तो सचिव ने मोबाइल नहीं उठाया। जबकि, घंटी लगातार बज रही थी। इससे अभ्यर्थियों की नाराजगी और बढ़ गई है।