कोरोना वायरस से निपटने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के तमाम शिक्षकों ने एक दिन का वेतन देकर मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाए हैं तो पूर्व शिक्षक भी इस काम में पीछे नहीं है। इस महामारी के खिलाफ जंग में पूर्व शिक्षक प्रो. एमसी शर्मा ने तो अपनी पेंशन से एक लाख रुपये दे दिए। वहीं, उत्तर प्रदेश आवासीय विश्वविद्यालय शिक्षक महासंघ के पूर्व अध्यक्ष प्रो. योगेश्वर तिवारी ने प्रदेश भर के सभी विश्वविद्यालयों के शिक्षकों से भी मांग की गई है कि कम से कम एक दिन का वेतन जरूर दें।
प्रो. एमसी शर्मा इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भौतिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष थे। रिटायरमेंट के बाद इन दिनों बंगलूरू में रहते हैं। उन्होंने अपनी पेंशन से एक लाख रुपये दिए हैं। वहीं, इविवि एवं संघटक महाविद्यालयों के सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने भी अपना एक दिन वेतन दिया है। इसके अलावा बड़ी संख्या में कई अन्य पूर्व शिक्षकों ने अपनी पेंशन से सहयोग राशि दी है। उत्तर प्रदेश आवासीय विश्वविद्यालय शिक्षक महासंघ के दस साल तक अध्यक्ष रहे प्रो. योगेश्वर तिवारी ने सभी विश्वविद्यालयों के शिक्षक संघ के अध्यक्ष से अपील की है कि वे भी इस कार्य में सहयोग करें और अपने यहां के शिक्षक से एक-एक दिन का वेतन देने का आग्रह करें।
जरूरतमंदों को भोजन करा रहे शिक्षक
इलाहाबाद विश्वविद्यालय और संघटक महाविद्यालय के शिक्षकों ने भी जरूरतमंदों के लिए मदद के हाथ बढ़ाए हैं। जहां जैसी जरूरत है, वहां उसी के अनुरूप मदद मुहैया कराई जा रही है। विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने सोमवार को पूड़ी-सब्जी के सवा सौ पैकेट बांटे। कुछ पैकेट हिंदू हॉस्टल के पास और बाकी केपी कम्युनिटी हॉल में वितरित किए गए। वहीं, ऑक्टा की ओर से जॉर्जटाउन थाने के पास झोपड़ पट्टी में राशन के 40 पैकेट वितरित किए गए।
ऑक्टा महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह के अनुसार एक पैकेट में दो किलो आटा, एक किलो चावल, आधा किलो दाल और नमक, तेल एवं सब्जी मसाला का है। इनका वितरण पूर्व पार्षद शिव सेवक सिंह के निर्देशन में किया गया। इसके अलावा अल्लापुर हैजा अस्पताल के पास मलिन बस्ती एवं केपी कम्युनिटी हॉल में भी भोजन के पैकेट बांटे गए। साथ ही अल्लापुर पुलिस चौकी के पास राशन का वितरण किया गया। इस कार्य में ईसीसी के शिक्षक डॉ. प्रेम प्रकाश, ऑक्टा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राम प्रकाश सिंह, ईसीसी के छात्र शिवम श्रीवास्तव एवं विश्वविद्यालय के छात्र पुर्णेंदु पांडेय का महत्वपूर्ण योगदान रहा।