... तो कैसे होगा तीन साल में 100 फीसदी कुत्तों का ऑपरेशन
पशुधन विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले तीन साल में शहरी क्षेत्र में आवारा कुत्तों के नसबंदी का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके तहत 75 से 80 फीसदी यानि करीब एक लाख कुत्तों का ऑपरेशन करने के साथ टीकाकरण अभियान पूरा हो जाएगा। इसके विपरीत विपरीत सच्चाई यह है कि अब तक तीन वर्षों में चले अभियान के दौरान 17 से 18 हजार कुत्तों का ही ऑपरेशन हो सका है।
गौर करने वाली बात यह भी है कि निगम के एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर की क्षमता रोजाना 20 से 25 कुत्तों के ऑपरेशन एवं टीकाकरण की है। हालांकि अफसरों का दावा है कि क्षमता बढ़ाई गई है और अब 50 से 60 कुत्तों की नसबंदी हो सकेगी। इस लिहाज से भी एक साल में अधिकतम करीब 22 हजार कुत्तों की ही नसबंदी हो पाएगी। इस तरह से तीन वर्ष में 65 से 66 हजार आवारा कुत्तों का ही ऑपरेशन हो पाएगा। ऐसे में आगामी तीन वर्ष में एक लाख कुत्तों का ऑपरेशन कैसे हो पाएगा यह सवाल बना हुआ है।
कुत्तों के काटने की घटनाएं कम हुई हैं। इसे लेकर शिकायतें भी कम आ रही हैं। अब कुत्तों के ऑपरेशन एवं टीका लगाने की मांग को लेकर ज्यादा फोन आने लगे हैं। आवारा कुत्तों की धड़पकड़ में तेजी भी लाई गई है। अभियान का असर अभी नहीं दिख रहा लेकिन तीन-चार साल बाद लाभ दिखेगा। - विजय अमृतराज, पशुधन अधिकारी, नगर निगम
आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए चले अभियान
पार्षद मीनू तिवारी ने नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर आवारा कुत्तों की धरपकड़ के लिए अभियान चलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि शहर में कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। उन्होंने कुत्तों को शहर से बाहर करने के साथ टोल फ्री नंबर जारी करने की भी मांग की।