दिवाली और भैया दूज मनाने के बाद वापसी करने वाले लोगों की भीड़ शुक्रवार को भी रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन पर उमड़ी। आलम यह रहा कि प्रयागराज जंक्शन से नई दिल्ली के लिए डुप्लीकेट प्रयागराज एक्सप्रेस भी चलाई गई। बावजूद इसके भीड़ कम न हुई। इस बीच बृहस्पतिवार को प्रयागराज एक्सप्रेस के जनरल कोच में बैठने को लेकर यात्रियों द्वारा इमरजेंसी विंडो का शीशा और खिड़की की रॉड तोड़ने की घटना के बाद रेलवे ने विशेष इंतजाम किए।
महाकुंभ के बाद पहली बार जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर बैरिकेडिंग लगाई गई। इसके अलावा रस्सा बांधा गया। फिर जनरल कोच में सफर करने वाले यात्रियों लाइन लगवाकर चढ़ाया गया। आरपीएफ और रेलवे के चेकिंग स्टाफ प्रयागराज एक्सप्रेस की रवानगी होने तक प्लेटफॉर्म पर ही डटे रहे।
इसके पूर्व जंक्शन से नई दिल्ली के लिए डुप्लीकेट प्रयागराज एक्सप्रेस ट्रेन रात 9:30 बजे प्लेटफॉर्म नंबर दो से रवाना की गई। स्टेशन निदेशक वीके द्विवेदी, दिलीप ठाकुर, आरपीएफ इंसपेक्टर अमित मीणा शाम सात बजे से प्लेटफॉर्म पर डट गए। रात आठ बजे से यात्रियों की लंबी कतार लग गई। इस दौरान यात्रियों को डुप्लीकेट प्रयागराज एक्सप्रेस की जानकारी दी जाती रही।
इसके पूर्व बिहार जाने वाली ट्रेनें भी ठसाठस रहीं। स्लीपर और जनरल कोच की गैलरी और दरवाजे के पास पैर रखने तक की जगह न दिखी। कुछ ने जान जोखिम में डालकर गेट पर लटक कर यात्रा की। सीमांचल, नार्थ ईस्ट, महानंदा, महाबोधि, मगध, नेता जी एक्सप्रेस भीड़ से ठसाठस रही। इस वजह से कई यात्री ट्रेन में ही नहीं चढ़ सके। वहीं, काफी लोगों ने रोडवेज की बसों से सफर तय किया। इस वजह से रोडवेज की बसें भी यात्रियों से ठसाठस रहीं।