चाकू बरामदगी के 39 साल पुराने मामले में अभियोजन न गवाह पेश कर सका और न ही सुबूत मिला। जिला अदालत ने आरोपी मुजफ्फर हसन को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। वहीं, दूसरे आरोपी शकील की मृत्यु होने के कारण मुकदमा खत्म हो गया।
चाकू बरामदगी के 39 साल पुराने मामले में अभियोजन न गवाह पेश कर सका और न ही सुबूत मिला। जिला अदालत ने आरोपी मुजफ्फर हसन को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। वहीं, दूसरे आरोपी शकील की मृत्यु होने के कारण मुकदमा खत्म हो गया। यह फैसला अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप पारचा की अदालत ने सुनाया है। मामला प्रयागराज के कीडगंज थाना क्षेत्र का है।
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10 जून 1986 की रात जब कीडगंज थाने के एसओ आरडी पाठक पुलिस टीम के साथ महात्मा गांधी मार्ग पर गश्त कर रहे थे। इसी बीच उन्हें मुखबिर से मैहर में लूट की घटना अंजाम देकर भगाने वालों के सीएमपी डॉट पुल के पास से गुजरने की सूचना मिली। उनकी तलाश में जुटी पुलिस ने एक ट्रक से मुजफ्फर हसन व शकील अहमद नाम के दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। दावा किया कि उनकी तहमद और पैंट से दो चाकू बरामद हुए। इसका उनके पास लाइसेंस नहीं था।
पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना की। इसके बाद दोनों के खिलाफ आयुध अधिनियम के तहत आरोप पत्र दाखिल कर दिया। ट्रायल कोर्ट में 2012 में आरोप निर्मित होने के साथ गवाही शुरू हुई। वहीं, अभियोजन की ओर से आरोपियों की गिरफ्तार करने वाले पुलिसकर्मी तक गवाही देने नहीं पहुंचे। साथ ही बरामद चाकू की कार्यशीलता पर विशेषज्ञ की रिपोर्ट अदालत में पेश नहीं की जा सकी। लिहाजा, कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी मुजफ्फर को दोषमुक्त कर दिया।