मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) से पीएचडी कर रहे श्रेष्ठ जायसवाल दो साल पहले अपना स्टार्टअप शुरू कर न सिर्फ आत्मनिर्भर बने, बल्कि पर्यावरण के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) से पीएचडी कर रहे श्रेष्ठ जायसवाल दो साल पहले अपना स्टार्टअप शुरू कर न सिर्फ आत्मनिर्भर बने, बल्कि पर्यावरण के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने नए विचार से उन्होंने प्रयागराज के होटलों को प्लास्टिक की जगह कांच की बोतलों का विकल्प उपलब्ध कराया।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मोनिरबा से एमबीए करने के बाद श्रेष्ठ ने बैंक में नौकरी कर ली। इस दौरान उन्हें पता चला कि दिल्ली, मुंबई, जयपुर जैसे महानगरों में होटलों व रेस्टोरेंट्स में कांच की बोतलों का इस्तेमाल होता है। उन्होंने इस दिशा में अपना स्टार्टअप शुरू करने का निर्णय लिया और नौकरी छोड़कर इकट्ठी की गई जमापूंजी स्टार्टअप में लगा दी।
मई-2023 में उन्होंने फिरोजाबाद से कांच की कुछ बोतलें मंगाई और होटलों में संपर्क किया। वर्तमान में प्रयागराज के पांच होटलों में वह कांच की बोतलें सप्लाई कर रहे हैं। होटलों में ग्राहकों को जिस मूल्य पर प्लास्टिक की बोतलें मिलती हैं, उसी कीमत पर अब कांच की बोतलें उपलब्ध कराई जा रही हैं। श्रेष्ठ प्रयागराज के होटलों से 20 हजार से अधिक प्लास्टिक की बोतलों को अब तक बाहर कर चुके हैं।
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इनोवेशन फॉर सप्लाई चेन में पीएचडी कर रहे श्रेष्ठ का कहना है कि प्लास्टिक की बोतलों का एक बार से अधिक इस्तेमाल पर्यावरण व स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक है, लेकिन कांच की बोतलों का इस्तेमाल उसकी गुणवत्ता के अनुरूप एक से अधिक बार किया जा सकता है। उनका उद्देश्य होटलों से प्लास्टिक की बोतलों को पूरी तरह से बाहर करना है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर मंडरा रहे खतरे को भी दूर किया जा सके।