यह कमेटी सभी तथ्यों की जांच कर अपनी रिपोर्ट कार्य परिषद के समक्ष प्रस्तुत करेगी। सूत्रों के मुताबिक यह कमेटी कई बिंदुओं पर जांच करेगी। कमेटी देखेगी कि इससे पूर्व प्रो. मोहम्मद शाहिद कब-कब विदेश गए? देश से बाहर जाने के लिए उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन ने अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनपओसी) लिया था कि नहीं? विदेश जाने से पहले प्रोफेसर ने विश्वविद्यालय को सूचना दी थी या नहीं?
जांच कमेटी में राजनीति विज्ञान की विभागाध्यक्ष प्रो. अनुराधा अग्रवाल को इसलिए शामिल किया गया है कि ताकि वह बताएं कि प्रोफेसर विभाग में समय से पाठ्यक्रम पूूरा करा पा रहे थे या नहीं? अपने सहयागियों के साथ उनका व्यवहार कैसा है और विभागाध्यक्ष की ओर से दिए गए कार्यों को समय से पूरा करते हैं या नहीं। प्रोफेसर का अपने शोधार्थियों और विभाग के अन्य छात्रों के साथ कैसा व्यवहार है, इस बिंदु की जांच भी की जाएगी और जरूरत पड़ने पर कुछ छात्रों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं।
प्रोफेसर ने कब-कब छुट्टी ली और इसके लिए आवेदन पत्र दिया था या नहीं, इसकी जांच भी होगी। इसके अलावा पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर में प्रोफेसर पर जो आरोप लगाए गए हैं, जांच कमेटी अपने स्तर से उसकी समीक्षा भी करेगी। साथ ही प्रोफेसर मरकज में शामिल होने के लिए दिल्ली कब गए और वहां से कब लौटे, इस तथ्य की भी जांच की जाएगी। प्रोफेसर की पर्सनल फाइल भी खंगाली जाएगी। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि इससे पहले प्रोफेसर के खिलाफ कोई शिकायत हुई थी या नहीं?
क्या इससे पहले उनके खिलाफ कभी कोई कार्रवाई की गई है? उनकी छुट्टियों का विवरण भी खंगाला जाएगा। सूत्रों का कहना है कि पूर्व में एक बार बिना बताए विदेश जाने प्रोफेसर को वेतन रोक दिया गया था। कमेटी इस तथ्य की भी जांच करेगी। जांच पूरी करने के बाद कमेटी कार्य परिषद की अगली बैठक में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।