इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि ग्रामसभा की जमीन पर घर बनाना सार्वजनिक संपत्ति नुकसान रोकथाम अधिनियम-1984 के तहत नहीं माना जा सकता। कब्जे से संबंधित विवादों का निपटारा राजस्व अधिकारियों की ओर से किया जाना चाहिए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि ग्रामसभा की जमीन पर घर बनाना सार्वजनिक संपत्ति नुकसान रोकथाम अधिनियम-1984 के तहत नहीं माना जा सकता। कब्जे से संबंधित विवादों का निपटारा राजस्व अधिकारियों की ओर से किया जाना चाहिए। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने प्रयागराज के जमुना प्रसाद उर्फ लल्लू के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकलपीठ ने दिया।
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याची पर आरोप था कि उसने बारा तहसील में आराजी नंबर 105 पर अवैध रूप से घर बनाया था जो राजस्व रिकॉर्ड में खलिहान के रूप में दर्ज है। यह जमीन ग्रामसभा की है। मामले को लेकर पुलिस ने सार्वजनिक संपत्ति नुकसान रोकथाम अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया। इस पर उसने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर मुकदमे को रद्द करने की मांग की।
कोर्ट ने कहा कि अधिनियम का उद्देश्य दंगों और सार्वजनिक हंगामे के दौरान होने वाली तोड़फोड़ और क्षति को रोकना है। ग्रामसभा की जमीन पर अवैध कब्जे से संबंधित विवादों का निपटारा राजस्व अधिकारियों की ओर से किया जाना चाहिए। कोर्ट ने मुंशी लाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के फैसले का हवाला दिया।