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Mahakumbh : प्लास्टिक मुक्त होगा कुंभ, मांस-मदिरा की दुकानों को 15 किमी दूर ले जाने का प्रस्ताव

Thu, 18 Jul 2024 03:33 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मंडलायुक्त कार्यालय के गांधी सभागार में अधिकारियों और अखाड़ा परिषद के संतों के बीच हुई बैठक में सभी संतों ने गंगा की निर्मलता और पॉलिथीन मुक्त मेले पर जोर दिया। साथ ही अखाड़ों को सुविधा और सुरक्षा देने पर चर्चा की। बैठक के प्रारंभ में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि व अन्य संत महात्माओं का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया।
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महाकुंभ को लेकर कमिश्नर के कार्यालय में साधु-संतों और अफसरों की बैठक हुई। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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महाकुंभ को दिव्य-भव्य-नव्य बनाने के लिए बृहस्पतिवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के साथ कुंभ मेला प्रशासन ने स्वच्छता, सुविधा और सेवा समेत कई मुद्दों पर मंथन किया। इस दौरान महाकुंभ को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए मेला प्रशासन और संतों के बीच सहमति बनी। अखाड़ा परिषद ने मांस-मदिरा की दुकानों को मेला क्षेत्र से 15 किमी दूर ले जाने का प्रस्ताव दिया।

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13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में भूमि सुविधाएं बढ़ाने, पेशवाई मार्गों के चौड़ीकरण के साथ ही लटके तार-खंभों को दुरुस्त कराने और संतों-भक्तों के संगम पर निर्मल गंगा की धारा मुहैया कराने पर विचार किया गया। मंडलायुक्त के गांधी सभागार में वैदिक मंगलाचरण के साथ बैठक आरंभ हुई। अफसरों ने माला पहनाकर संतों का स्वागत किया। इसके बाद कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने तैयारियों के बारे में जानकारी दी।

अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने कहा कि इस बार प्लास्टिक मुक्त मेला होना चाहिए। मेला क्षेत्र में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने के अनुमान के बीच स्वच्छता सबसे बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने शिविरों और मेले की दुकानों पर प्लास्टिक की जगह कागज के बैग और मिट्टी के बर्तन रखने का सुझाव दिया। अफसरों का कहना था कि पूरी कोशिश होगी कि प्लास्टिक मेला क्षेत्र में प्रतिबंधित किया जाए।

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महाकुंभ को लेकर साधु-संतों और अफसरों की बैठक हुई। - फोटो : अमर उजाला।
अखाड़ा परिषद के महामंत्री ने कुंभ मेला क्षेत्र से मांस-मदिरा की दुकानों को 15 किमी दूर करने का प्रस्ताव रखा। संतों का कहना था कि महाकुंभ के दौरान शहर के बाहरी इलाके में मंडी बनाकर मांस-मदिरा की दुकानें लगवाने की व्यवस्था की जाए।

निर्मल अखाड़े के सचिव देवेंद्र शास्त्री का कहना था कि पेशवाई मार्गाें के अलावा अन्य सड़कों को तोड़कर छोड़ दिया गया है। बेतरतीब ढंग से काम किया जा रहा है। मेलाधिकारी ने भरोसा दिलाया कि अक्तूबर तक सड़कों समेत अन्य परियोजनाओं का काम पूरा कर लिया जाएगा।

महाकुंभ को लेकर अफसरों और साधु-संतों की बैठक हुई। - फोटो : अमर उजाला।
महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव महंत यमुना पुरी का कहना था कि मेले में संतों और भक्तों की संख्या में इजाफा होगा। ऐसे में संतों मिलने वाली भूमि-सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए। अच्छे टेंट की सुविधा देने की बात कही गई। मेलाधिकारी ने बताया कि आठ सौ हेक्टेयर मेला क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है। संतों और भक्तों को पर्याप्त सुविधाएं दी जाएंगी। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी का कहना था कि संतों-भक्तों को किसी तरह की परेशानी न होने पाए, इसका प्रशासन को ध्यान रखना चाहिए।

बैठक में निरंजनी अखाड़े के महंत राधे गिरि, दूना अखाड़े के प्रवक्ता महंत नारायण गिरि, आवाहन अखाड़े के सचिव सत्य गिरि, नया उदासीन अखाड़े के महंत जगतार मुनि, बड़ा उदासीन अखाड़े के सचिव व्यास मुनि, शिवानंद गिरि, निर्मोही अनी अखाड़े के सचिव राजेंद्र दास, निर्वाणी अणी अखाड़े के सचिव मुरली धर दास, अग्नि अखाड़े के सोमेश्वरानंद सरस्वती, दिगंबर अखाड़े के राम किशोर दास, महंत महेश दास, महंत नरेंद्र दास समेत अखाड़ों के अन्य प्रतिनिधियों के अलावा मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, एडीजी भानु भास्कर, पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा, डीएम नवनीत सिंह चहल, पीडीए वीसी अरविंद सिंह चौहान समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।
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महाकुंभ को लेकर साधु-संतों के साथ अधिकारियों की बैठक हुई। - फोटो : अमर उजाला।
भक्तों को मिले निर्मल गंगा की धारा

संतों ने संगम पर गंगा की निर्मल धारा मुहैया कराने के लिए कहा। संतों ने कहा कि महाकुंभ में बिना शोधित किए नालों का पानी गंगा में बहाने पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए। इसके लिए समय रहते यूपी और उत्तराखंड की सरकारों से समन्वय स्थापित किया जाना चाहिए।

अखाड़ों ने पक्के निर्माण योजना की जानकारी ली

मेला प्रशासन के समक्ष कुंभ-2019 की तरह अखाड़ों को दो-दो करोड़ रुपये सुविधाओं के विस्तार के लिए देने का मुद्दा उठाया गया। महंत राजेंद्र दास, महंत यमुनापुरी और महंत नारायण गिरि ने कहा कि पिछले कुंभ में अखाड़ों को पक्के निर्माणों के लिए धनराशि दी गई थी। इस बार क्या निर्णय लिया गया है। इस पर मेलाधिकारी ने बताया कि अभी इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। अगर सरकार की ओर से कोई दिशा-निर्देश आता है तो अवगत करा दिया जाएगा।
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