डेयरियों को बाहर करने की आएगी नीति
महाकुंभ से पहले डेयरियों तथा पशु पालकों को शहर से बाहर करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए पहल भी की गई लेकिन नीति नहीं होने की वजह से कार्रवाई बीच में ही रोकनी पड़ी। अब आचार संहिता खत्म होने के बाद नई नीति के जल्द आने की उम्मीद है। इसके अलावा आचार संहिता की वजह से किसी तरह की रोक तो नहीं थी लेकिन चुनाव में नाराजगी न बढ़ने पाए इसके लिए अतिक्रमण के खिलाफ अभियान, आवारा पशुओं को बाहर करने समेत कई तरह की कार्रवाइयां रोक दी गई हैं। इसी तरह से रोक नहीं होने के बावजूद कई विकास कार्यों के शिलान्यास आदि नहीं हो पा रहे लेकिन अब यह दबाव भी खत्म हो गया है।
मिलेगा योजनाओं का लाभ
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर आचार संहिता 16 मार्च को लागू हुई थी। ऐसे में वित्तीय वर्ष खत्म होने के बाद विभागों को नए सिरे से बजट जारी नहीं हो पाए। सिर्फ आवश्यक कार्यों के लिए पैसा मिला। यहां तक कि विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों के खाते में भी पैसा नहीं पहुंचा है। इसके अलावा पात्र पाए जाने के बावजूद हजारों लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं में शामिल नहीं किया जा सका है।
अकेले समाज कल्याण विभाग की वृद्धा पेंशन के लिए ही 14 हजार से अधिक आवेदन पात्र पाए गए हैं। इनका सत्यापन भी हो गया है लेकिन आचार संहिता की वजह से इन्हें योजना में शामिल नहीं किया जा सका है। इसी तरह की स्थिति दिव्यांगजन कल्याण, पिछड़ी जाति कल्याण समेत अन्य विभागों में भी है। अब आचार संहिता खत्म होने के साथ इन्हें योजनाओं का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।