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सिविल सेवा के लिए ‘चुनाव’ नहीं हर फन में होना होगा माहिर

Thu, 03 May 2018 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा में चयनित होना कड़ी मेहनत और लगन से ही संभव है। उस पर टॉप टेन में जगह बनाना मामूली बात नहीं। इस बार सिविल सेवा परीक्षा में संगमनगरी के अनुभव सिंह ने आठवीं रैंक हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ ही इलाहाबाद के लोग भी खुश और रोमांचित हैं। इस सफलता से दूसरे भी प्रेरित हों और उनको मार्गदर्शन मिले, इसके लिए बुधवार को अमर उजाला कार्यालय में अनुभव को आमंत्रित किया गया। साथ ही प्रतियोगी छात्रों को भी बुलाया गया। इस दौरान संवाद में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी और उसके तरीके को लेकर तमाम सवाल, जिज्ञासाएं उठीं, जिसका अनुभव ने समाधान किया। प्रतियोगी छात्रों के साथ हुए संवाद में अनुभव ने अपनी सफलता की कहानी बताने के साथ कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। संवाद के प्रमुख अंश यहां दिए जा रहे हैं।
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प्री और मेंस की तैयारी में क्या है अंतर
0 प्री और मेंस की तैयारी में बहुत फर्क है। प्री के लिए हर विषय की जानकारी होनी चाहिए। इसके लिए परीक्षा से पहले दो महीने का वक्त होना चाहिए। वहीं मेंस में विषय की विस्तार से तथा विश्लेषणात्मक अध्ययन की जरूर होती है। यह अंतिम तौर से चयन और रैंक का आधार भी तैयार करता है। इसके लिए रणनीति के साथ तैयारी करनी होगी।

प्री के लिए हर विषय की पूरी रखें तैयारी
0 प्रारंभिक परीक्षा के लिए हर विषय की पूरी तैयार होनी चाहिए। किसी भी टॉपिक को छोड़ा नहीं जा सकता। क्योंकि पता नहीं होता कि क्या पूछ लिया जाए। इसके अलावा कई घटनाएं होती हैं, जिनके बारे में पत्रिका, नेट या अन्य कहीं से भी जानकारी नहीं मिलती। इसलिए समसामायिकी पर बहुत भरोसा नहीं कर सकते। सभी विषयों की बेसिक जानकारी जरूरी है। मेरे ही प्री-2016 में 146 अंक थे लेकिन 2017 में 112 हो गए। जबकि कटऑफ 108 गया था। इसलिए कुछ विषयों को ही पढ़ने से खतरा हो सकता है। प्री की तैयारी में एनसीईआरटी की किताबें ज्यादा मददगार हैं।
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निबंध में किन बातों का रखें ध्यान
0 निबंध के दो पहलू होते हैं। पहला है विषय की जानकारी और दूसरा उनका प्रस्तुतिकरण। निबंध कैसे लिखा जाना है, इसके लिए टॉपर्स की कॉपी देखनी चाहिए। निबंध तीन खंड में लिखें। शुरुआत हमेशा रुचिकर बिंदु से करनी चाहिए। ताकि, उसे पढ़ने की इच्छा जगे। इसके बाद विषय के पक्ष और विपक्ष, दोनों ही स्तर पर तर्कपूर्ण बात रखें। कोशिश हो कि पक्ष और विपक्ष में तर्क अलग-अलग रखें। अंत दार्शनिक और प्रभावशाली होने के साथ सकारात्मक होना चाहिए। निबंध के दो सेक्शन होते हैं। पहले सेक्शन में सामाजिक मुद्दों से जुड़े निबंध होते हैं। दूसरे सेक्शन में घटनात्मक तथा अन्य बिंदु से जुड़े निबंध होते हैं। इसमें कई बार विषय को लेकर दुविधा होती है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। एक ही निबंध को कई तरह से लिखा जा सकता है लेकिन, वह प्रभावी होना चाहिए। जो भी लिखें उसके पक्ष में तर्क मजबूत हाें। परीक्षक इस पेपर में आपकी मौलिकता और विचारों को जानना चाहते हैं।

जीएस कैसे तैयार करें
0 मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन का महत्व बढ़ गया है। इसके लिए टॉपर्स की कॉपियों का अध्ययन करना चाहिए। हर पेपर की तैयारी की रणनीति भी अलग-अलग होनी चाहिए। जैसे, विश्व के इतिहास के लिए नार्मल लव को पढ़ें। सामाजिक बिंदुओं वाले पेपर के लिए आपके अनुभव और मौलिकता का अधिक महत्व है। इसमें समाजशास्त्र की किताबें, एनसीईआरटी की पुस्तकें मददगार होंगी। मॉडर्न कल्चर के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकें, इंटरनेट आदि की मदद से खुद का नोट्स तैयार करना चाहिए।

हिंदी या अंग्रेजी माध्यम से फर्क तो नहीं पड़ता
0 संघ लोक सेवा आयोग के पैनल में बहुत अनुभवी लोग होते हैं। मैं नहीं मानता कि हिंदी और अंग्रेजी माध्यम को लेकर वे किसी तरह का भेदभाव करते होंगे। मूल्यांकन सिर्फ इस आधार पर होता है कि कॉपी में क्या लिखा गया है।

ज्यादातर आईआईटीयन ही क्यों होते हैं सफल
0 आईआईटी के छात्र-छात्राओं की सिविल सेवा में सफलता के पीछे मुख्य वजह पढ़ाई के प्रति उनका अनुशासन है। हाईस्कूल से अनुशासित तैयारी करते हैं, तब आईआईटी जैसे संस्थानों में सफलता मिलती है। उसी अनुशासन से सिविल सेवा में सफलता मिलती है। इसके अलावा आईआईटी के भी 90 फीसदी प्रतियोगी मेंस में आर्ट्स के विषय रखते हैं। इंजीनियरिंग तथा विज्ञान के विषय कठिन होते हैं। उनकी तैयारी जटिल है। इसकी अपेक्षा आर्ट्स के विषय कम जटिल होते हैं। इसलिए उन्हें समझना आसान होता है।

हॉबी और मनोरंजन में फर्क
0 फार्म में हॉबी का कॉलम काफी महत्वपूर्ण होता है। हॉबी का अर्थ भी समझने की जरूरत है। यदि आप दबंग, सिंघम आदि फिल्में देखते हैं तो यह हॉबी नहीं हो सकती, यह मनोरंजन है। हॉबी का अर्थ है कि हिंदी सिनेमा में क्या चल रहा, फ्रेंच सिनेमा वर्तमान में किस दिशा में जा रहा है, आदि बिंदुओं पर जानकारी होनी चाहिए। यदि आपकी कोई हॉबी नहीं है तो बनाइए और उसके बारे में जानिए।

इंटरव्यू के लिए मॉक टेस्ट क्यों जरूरी
0 मेरी सलाह है कि इंटरव्यू के लिए मॉक टेस्ट जरूर दीजिए। यदि आप वहां तक पहुंच गए हैं तो इसकी मदद लेनी चाहिए। मेरा व्यक्तिगत अनुभव है। इसका लाभ होता है।

अनुभव की सलाह
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घंटों पर नहीं लगन से पढ़ाई पर दें ध्यान
0 सिविल सर्विसेज की तैयारी में यह मायने नहीं रखता कि आप कितने घंटे तैयारी करते हैं। महत्वपूर्ण है आपका कांस्ट्रेशन। अनुभव कहते हैं, यदि आप एक घंटा मन लगाकर पढ़ सकते हैं तो पूरे दिन को एक-एक घंटे के नौ-दस स्लैब में बांट लें और उसके अनुसार तैयारी करें।

बीटेक के दौरान ही शुरू कर दी तैयारी
0 बीटेक द्वितीय वर्ष की पढ़ाई के दौरान ही सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू कर दी थी। बीटेक अंतिम सेमेस्टर से योजनाबद्ध तरीके से तैयारी शुरू कर दी। बीटेक की पढ़ाई के अलावा सिविल सर्विसेज के लिए अलग से चार से छह घंटे रोजाना दिया।

बिना कोचिंग भी सफलता मुमकिन
0 अभिभावक हाईस्कूल में ही बच्चे को कोचिंग में डालकर जिम्मेदारी से मुक्त होना मान लेते हैं लेकिन, इससे मौलिकता मर जाती है। एक स्तर पर गाइड  या कोचिंग की जरूरत होती है लेकिन मेरे कई मित्र हैं जिन्हाेंने बिना कोचिंग के सफलता हासिल की।

भाग्य भरोसे मत बैठिए
0 सिविल सेवा में बिना तैयारी के सफलता हासिल नहीं की जा सकती। आप एक-दो नंबर से चूक जाएं तो दुर्भाग्य है लेकिन, वहां तक पहुंचने के लिए तैयारी ही मायने रखती है।

दबाव नहीं खुले दिमाग से करें तैयारी
0 मैं आईआईटी का छात्र रहा। इसके बाद पहले अवसर में ही आईआरएस बन गया। इसलिए नौकरी का मेरे लिए कभी प्रेशर नहीं रहा लेकिन, इतना जरूर कहूंगा कि सिविल सर्विस ही जीवन में सबकुछ नहीं है। इसे जीवन-मरण से जोड़ने की जरूरत नहीं है। दबाव नहीं, खुले दिमाग से तैयारी करें।

असफलता के बाद सबकुछ नहीं हो जाता खत्म
0 कई लोग होते हैं जो योग्य होने के बावजूद सिविल सेवा में सफल नहीं हो पाते लेकिन, यह ध्यान रखना चाहिए कि असफलता के बाद सबकुछ खत्म नहीं हो जाता। सिविल सेवा में सभी का चयन नहीं हो सकता। इंटरव्यू से वापस होने वाले ऐसे कई लोग हैं जो दूसरे क्षेत्र में काफी आगे निकले। आपको अपनी रुचि देखनी होगी और उसी के अनुरूप आगे बढ़ना होगा।
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