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UP: आठ किलो देसी घी और 126.50 रुपये की लूट, 41 साल बाद मिली बेगुनाही; कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, दिया ये तर्क

Tue, 04 Aug 2026 11:19 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

आठ किलो देसी घी और 126.50 रुपये की लूट के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 41 साल बाद आरोपियों को बरी कर दिया है। इनमें से दो आरोपियों की मौत हो चुकी है।
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allahabad high court - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शिनाख्त परेड में हुई लंबी देरी की ठोस वजह नहीं बता सकना अभियोजन की बड़ी विफलता है। आरोपी इससे उपजे संदेह का लाभपाने का अधिकारी होता है।
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इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति संतोष राय की अदालत ने बदायूं में 41 साल पहले आठ किलो देसी घी और सवा सौ रुपये की लूट में सजा पाए कन्हई और कल्लू को बेगुनाह बताते हुए बरी कर दिया। 

जबकि, सह-आरोपी हरपाल और दलचंद की अपील लंबित रहने के दौरान मौत हो जाने के कारण उनकी अपील पहले ही उपशमित हो चुकी है। इन्हें बदायूं की विशेष अदालत ने 15 मई 1987 को पांच साल की कैद की सजा सुनाई थी।
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मामला बदायूं जिले के बिसौली थाना क्षेत्र का है। 21 फरवरी 1985 को राधेश्याम शर्मा ने अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि वह साइकिल से बिसाउली से अपने गांव पालिया जा रहे थे। कोट और बिसाउली के बीच सड़क किनारे चार बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। 

उन्होंने चाकू उनकी छाती पर रखकर उनसे चार किलो देसी घी के दो डिब्बे और 126.50 रुपये और कुछ किराने का सामान लूट लिया। मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जेल भेजने के 42 दिन बाद शिनाख्त परेड कराई। 

इसके बाद कन्हई, कल्लू, हरपाल और दलचंद के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया। 1987 में ट्रायल कोर्ट ने चारों आरोपियों को दोषी पाते हुए सजा सुना दी। इसके खिलाफ चारों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। कोर्ट ने पाया कि आरोपियों की शिनाख्त परेड जेल भेजे जाने के लगभग 42 दिन बाद और घटना के ढाई महीने बाद कराई गई थी। 

शिनाख्त परेड में देरी की वजह नहीं बताना अभियोजन की विफलता: कोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शिनाख्त परेड में हुई लंबी देरी की ठोस वजह नहीं बता सकना अभियोजन की बड़ी विफलता है। आरोपी इससे उपजे संदेह का लाभ पाने का अधिकारी होता है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति संतोष राय की अदालत ने बदायूं में 41 साल पहले आठ किलो देसी घी और सवा सौ रुपये की लूट में सजा पाए कन्हई और कल्लू को बेगुनाह बताते हुए बरी कर दिया। 

उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन पर प्रतिबंध लगाने से हाईकोर्ट का इन्कार
वहीं, एक अन्य मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) पर प्रतिबंध लगाने, लगाने, उसकी संपत्तियों के हस्तांतरण, सीबीआई जांच और बीसीसीआई के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका को खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता और करीब दो दशक पुराने घटनाक्रम को इस स्तर पर चुनौती नहीं दी जा सकती। 

यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने द क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तर प्रदेश की ओर से दायर याचिका पर दिया। याचिका में दावा किया गया था कि वर्ष 1955 में सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत गठित पुरानी द उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन का विधिसम्मत तरीके से विघटन नहीं किया गया। 

भाजपा नेता पर पोस्ट के मामले में निलंबित शिक्षक बहाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिरोजाबाद के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के सहायक शिक्षक प्रदीप प्रताप सिंह के निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने दिया है। भाजपा के जिला अध्यक्ष के कथित गलत कार्यों पर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के आरोप में याची शिक्षक को निलंबित किया गया था। 

 
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याची शिक्षक ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि किसी गलत कार्य, गबन या जनहित से जुड़े मामले को उजागर करना मात्र कदाचार नहीं माना जा सकता, जब तक कि वह कानून या संबंधित सेवा नियमों का उल्लंघन न करता हो। कोर्ट ने शिक्षक की याचिका स्वीकार करते हुए फिरोजाबाद के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के 4 जुलाई 2026 को जारी निलंबन आदेश रद्द कर दिया।
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