बकरीद नजदीक आते ही बकरे के बाजार सज गए हैं। साथ ही भाव भी बढ़ने लगे हैं। स्थानीय बाजार में अलग-अलग जिलों और राज्यों से पहुंचे बकरे आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। इनमें गंगापारी, जमुनापारी और मध्य प्रदेश से आए बकरों की भरमार है, लेकिन महंगे होने के बावजूद राजस्थानी बकरों की मांग अधिक है।
कुर्बानी का प्रतीक माने जाने वाले बकरीद त्योहार को लेकर मुस्लिम समाज में उत्साह है। चांद दिखने के बाद सात जून को बकरीद का त्योहार मनाया जाएगा। इससे पहले जिले में करेली, मुट्ठीगंज, मनौरी और सरायअकिल की मंडियों में जगह-जगह से कुर्बानी के लिए बकरे पहुंचने लगे हैं। इसके साथ ही खरीदार भी जुटने लगे हैं।
कारोबारी नजीउद्यीन के मुताबिक, गंगापारी और यमुनापारी बकरे की कीमत 16 हजार रुपये से 18 हजार रुपये के बीच है, जबकि मध्य प्रदेश से आ रहे बकरों की कीमत 12 से 14 हजार रुपये बताई जा रही है। वहीं विक्रेता मुजीर ने बताया कि कौशांबी के चायल, भरवारी, मंझनपुर से देसी नस्ल के बकरों की कीमत 10 से 20 हजार रुपये के बीच है। कारोबारियों के अनुसार, सबसे अच्छा राजस्थानी नस्लों का बकरा माना जाता है, जिसकी कीमत फिलहाल 20 से 25 हजार रुपये तक बताई जा रही है।
पिछले वर्ष 75 हजार तक का बिका था बकरा
बकरा विक्रताओं के अनुसार, पिछले वर्ष मंडियों में कुर्बानी के लिए 75 हजार रुपये तक का बकरा बिका था। इनमें राजस्थानी नस्ल का बकरा सबसे ज्यादा बिका था। उन्होंने बताया कि जिले में करीब 25 हजार बकरों की कुर्बानी दी गई थी। विदित हो राजस्थानी बकरों की नस्लों में अलवरी, सिरोही, मारवाड़ी, शेखावाटी, लोही, परबतसरी आदि शामिल हैं।