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भविष्य पर ‘जिद’ का पहरा, लामबंद हुए युवा

Thu, 17 Sep 2015 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सरकार की सियासत से प्रेरित जिद की वजह से युवाओं का भविष्य अंधकार में है। विवादों की वजह से एक दर्जन से अधिक भर्तियों के 25 हजार से पदों की प्रक्रिया ठप है। इतना ही नहीं इसकी वजह से हजारों पदों का विज्ञापन भी नहीं हो पा रहा जबकि, भर्ती के लिए इनकी सूची तैयार कर ली गई है। इसके विरोध में युवा लामंबद भी होने लगे हैं। लोक सेवा आयोग के साथ अन्य भर्ती संस्थाओं के मुखिया तथा सदस्यों के चयन का मुद्दा हो या शिक्षामित्रों का मामला। हर भर्ती परीक्षा की शुचिता पर सवाल उठने तथा हजारों भर्तियां फंसी रहने से आहत तैयारी में जुटे युवाओं का बड़ा तबका अब सड़क पर है। उनके आंदोलन का दायरा भी अब विस्तृत हो गया है।
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इस स्थिति से आहत ब्यूरोक्रेट्स तथा शहर के अन्य प्रमुख लोग भी युवाओं के साथ आ गए हैं। इससे उत्साहित युवाओं ने लोक सेवा आयोग की भर्तियों के साथ अब लोकायुक्त की नियुक्ति, यादव सिंह आदि मुद्दे पर भी प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इन मुद्दों को लेकर वे प्रदेशव्यापी आंदोलन की तैयारी में हैं। इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। लोक सेवा आयोग की भर्तियों की सीबीआई जांच तथा अध्यक्ष को हटाने की मांग को लेकर प्रतियोगी लंबे समय से आंदोलनरत हैं। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिकाएं भी दाखिल कर रखी हैं, लेकिन प्रदेश सरकार उनकी मांग सुनने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में आयोग की भर्तियों पर सवाल बना हुआ है। इन विवादों के बीच उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के तीन सदस्यों को हाईकोर्ट ने अयोग्य ठहराया है। माध्यमिक  शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के तीन सदस्यों के भी काम करने पर रोक है।

 इसकी वजह से दोनों संस्थाआें में भर्ती प्रक्रिया ठप है। घोषणा के बावजूद नए नोटिफिकेशन भी नहीं हो पा रहे। इसके अलावा दरोगा, सिपाही समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद बना हुआ है। इन भर्तियों के रिजल्ट कई बार बदलने पड़े। ग्राम विकास अधिकारी की भर्ती प्रक्रिया पर भी रोक लग गई है। शिक्षामित्रों के मामले में भी सिर्फ सियासी लाभ की दृष्टि से निर्णय लेने का खामियाजा अब तकरीबन पौने दो लाख परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। अब उनके पास शिक्षामित्र की नौकरी भी नहीं है। इनके अलावा रविवार को आयोजित लेखपाल भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लग रहे हैं। पेपर लीक होने के साथ नकल की व्यापक शिकायत है। हालांकि अन्य भर्तियों की तरह इसमें भी अफसर किसी प्रकार की गड़बड़ी की बात स्वीकार नहीं कर रहे। ऐसे में इस भर्ती को भी न्यायालय में जाना तय माना जा रहा है।
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इस तरह से सभी भर्तियां फंस जाने की वजह लाखाें युवा दोराहे पर हैं। प्रदेश में यह स्थिति बनने से चिंतित कई वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारी भी प्रतियोगियों के आंदोलन में कूद पड़े हैं। इनकी तरफ से हाईकोर्ट में पहले ही याचिका दाखिल की जा चुकी है, अब 20 सितंबर को प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के बैनर तले कई आईएएस, आईपीएस तथा अन्य लोग जुट रहे हैं। इनके आने से यह आंदोलन अब सिर्फ लोक सेवा आयोग के खिलाफ नहीं रह गया है। प्रदेश में हर स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ हो गया है। इसीलिए इस आंदोलन में लोक सेवा आयोग के साथ प्रदेश की अन्य भर्ती परीक्षाओं में की जा रही अनियमिता को मुद्दा बनाया गया है। इससे पहले 19 सितंबर को भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा की ओर से भी प्रदेश की भर्तियों में व्याप्त अनियमितता के विरोध में कैंडल मार्च निकाला जाएगा। छात्र संघर्ष समिति के अयोध्या सिंह, अवनीश पांडेय आदि का कहना है कि प्रदेश की ज्यादातर भर्तियाें की प्रक्रिया पर रोक लगी हुई है। जिनके परिणाम घोषित हुए हैं, उनमें भी एक खास जाति के लोगों को वरीयता दी जा रही है। ऐसे में सड़क पर उतरने के अलावा उनके पास और कोई रास्ता नहीं बचा है।
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