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Prayagraj : ईडी का तुलसियानी के करीबी के फ्लैट पर छापा, लोटस अपार्टमेंट में देर रात तक चलती रही जांच-पड़ताल

Thu, 25 Apr 2024 01:13 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

ईडी की टीम सुबह सात बजे के करीब ताशकंद मार्ग स्थित लोटस अपार्टमेंट पहुंची। यहां टीम ने पाहूजा के बारे में पूछताछ की जो तुलसियानी ग्रुप के निदेशकों के करीबी हैं। जानकारी लेने के बाद अफसर दूसरे तल पर स्थित उनके फ्लैट पर पहुंचे तो वहां ताला लगा मिला।
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ईडी रेड। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तुलसियानी ग्रुप पर कार्रवाई के क्रम में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को सिविल लाइंस में कंपनी निदेशकों के करीबी दिनेश पाहूजा के फ्लैट पर छापा मारा। ताशकंद मार्ग स्थित लोटस अपार्टमेंट में रहने वाले पाहूजा के फ्लैट में ताला लगा होने के कारण टीम को लंबा इंतजार करना पड़ा। वह तो सामने नहीं आए, लेकिन शाम को उनके परिवार के पहुंचने के बाद टीम फ्लैट में देर रात तक जांच-पड़ताल में जुटी रही।

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ईडी की टीम सुबह सात बजे के करीब ताशकंद मार्ग स्थित लोटस अपार्टमेंट पहुंची। यहां टीम ने पाहूजा के बारे में पूछताछ की जो तुलसियानी ग्रुप के निदेशकों के करीबी हैं। जानकारी लेने के बाद अफसर दूसरे तल पर स्थित उनके फ्लैट पर पहुंचे तो वहां ताला लगा मिला। इसके बाद उनसे फोन पर बात की गई तो उन्होंने खुद के बाहर होनेे की बात बताई। जिस पर ईडी अफसराें ने माैके पर पहुंचने को कहा।

इसके बाद ईडी की टीम अपार्टमेंट में ही रुककर इंतजार करने लगी। वह तो नहीं आए, लेकिन शाम को उनके परिवार के आने पर फ्लैट का ताला खुलवाया गया और फिर तलाशी ली गई। सूत्रों का कहना है कि ईडी की टीम को कंपनी के नाम पर पंजाब नेशनल बैंक से कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर लिए गए 4.63 करोड़ के लोन से संबंधित दस्तावेजों की तलाश थी। देर रात तक टीम जांच-पड़ताल में जुटी थी।

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कई दिनों से लटका था ताला

सूत्रों ने बताया कि पाहूजा के फ्लैट में काफी दिनों से ताला लगा था। पाहूजा अक्सर बाहर ही रहते थे। 20 दिनों पहले उनका परिवार आया था जो कुछ दिनों बाद चला गया।

पिछले साल दर्ज हुआ था केस

तुलसियानी ग्रुप पर कार्रवाई उस पर पिछले साल दर्ज मनी लांड्रिंग के मामले में हुई। पिछले साल दिसंबर में ईडी ने कंपनी के सीएमडी अनिल कुमार तुलसियानी व निदेशक महेश तुलसियानी के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। इसके लिए पंजाब नेशनल बैंक के मैनेजर की ओर से लखनऊ में दर्ज कराई गई उस एफआईआर को आधार बनाया गया, जिसमें कपंनी पर 4.63 करोड़ रुपये का लोन कूटरचित दस्तावेजों के जरिये लेने का आरोप लगाया गया था। प्रारंभिक जांच में ही यह बात भी सामने आई थी कि कंपनी ने निवेशकों से फ्लैट के नाम पर ली गई रकम की भी हेराफेरी की।
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