फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पहले भी कांप चुका है गंगा का मैदान

Wed, 13 May 2015 12:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
एक माह के भीतर नेपाल में आए दो विनाशकारी भूकंपों के चलते गंगा का मैदान पहली बार थरथराया है, ऐसा नही है। अतीत पर नजर डालं तो पहले भी संगम नगरी और आसपास का इलाका भूकंप से न सिर्फ कांपा वरन नुकसान भी हुआ। 15 जनवरी 1934 को इंडो-नेपाल बार्डर पर ही आठ तीव्रता का भूकंप आया था। इस भूकंप से गंगा के मैदानी इलाकाें इलाहाबाद, लखनऊ और वाराणसी में नुकसान पहुंचा था। 15 जुलाई 1920 को नई दिल्ली में 7.6 तीव्रता का भूकंप आया था। भूकंप में दिल्ली और आसपास के इलाकों में जबरदस्त तबाही हुई थी। भूकंप के झटके गंगा के मैदानी इलाकों में महसूस किए गए थे।
विज्ञापन



10 अक्टूबर 1956 को भी यूपी के बुलंदशहर के जहांगीर में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया था। एक सितंबर 1803 में चमोली और 28 अगस्त 1916 को पश्चिमी नेपाल में आए भूकंप ने गंगा के मैदान को हिलाया। छह अगस्त 1925 को रायबरेली और सुल्तानपुर में छह तीव्रता वाले भूकंप आए थे। 15 सितंबर 1966 को मुरादाबाद, 21 अक्टूबर 1991 को उत्तरकाशी, 27 मार्च 1999 को चमोली के गोपेश्वर में आए विनाशकारी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। इसके अलावा गंगा के मैदान में कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। गनीमत रही कि भूकंप से कोई खास नुकसान नहीं हुआ। वहीं आईआईटी रुड़की के अर्थक्वेक साइंस के प्रोफेसर और भूकंप विज्ञानी डॉ. अन बालागन का कहना है कि गंगा का मैदानी इलाका भूकंप के लिहाज काफी सुरक्षित है लेकिन हिमालयन क्षेत्र खासकर उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भूगर्भ में जो हलचल जारी है, उससे भविष्य में बड़े विनाशकारी भूकंप की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें