भर्ती परीक्षाओं के पेपर में गलत प्रश्न तथा गलत जवाब को सही माने जाने की समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है। इससे युवाओं में जबरदस्त रोष है तथा वे ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। लोक सेवा आयोग, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड समेत सभी संस्थाओं की परीक्षाओं में गलत जवाब को सही माने जाने की शिकायत है। ज्यादातर परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की शिकायत के बाद भर्ती संस्था को जवाब बदलने पड़े। लोक सेवा आयोग को तो कई भर्तियों के परिणाम भी बदलने पड़े। इससे भर्ती संस्थाओं की पूरी व्यवस्था और शुचिता पर सवाल खड़ा हो गया है। प्रतियोगियों का आरोप है कि यह सब कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर किया जाता है।
लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं में गलत जवाब को सही माने जाने की शिकायत पीसीएस-2011 प्रारंभिक परीक्षा से बढ़ गई है। अभ्यर्थियाें की आपत्ति तथा न्यायिक लड़ाई के बाद आयोग को दो परीक्षाओं के रिजल्ट भी संशोधित करने पड़े। अब पीसीएस-2015 प्रारंभिक परीक्षा को लेकर गतिरोध बना हुआ है। दो प्रश्न के गलत जवाब पर अभ्यर्थियों की याचिका पर न्यायालय ने संशोधित परिणाम घोषित करने का आदेश दिया है। अब आयोग के सामने मुश्किल यह है कि इस भर्ती की मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित करने के अलावा साक्षात्कार भी हो चुका है।
आयोग की पीसीएस-2016 प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य अध्ययन के 18 प्रश्नों के जवाब पर भी अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई है। प्रतियोगी दोबारा परीक्षा कराने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आयोग में कई बार ज्ञापन सौंपा है। अब मांग नहीं माने जाने उन्होंने न्यायालय में याचिका दाखिल की है। इसके अलावा माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की टीजीटी, पीजीटी भर्ती परीक्षा में गलत प्रश्न पूछे जाने की बड़े पैमाने पर शिकायत रही। हिन्दी के पेपर में ज्यादातर प्रश्न गलत थे।
टीजीटी में इतिहास के 62 में से 58 प्रश्न तो एक ही गाइड से पूछे गए। कई के तो चारों विकल्प भी गलत हैं। कई अन्य विषयों के पेपर में भी इस तरह की शिकायत रही। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के बैनर तले अभ्यर्थियों ने साक्ष्य के रूप में गाइड के साथ बोर्ड में ज्ञापन साैंपा है। समिति के अवनीश पांडेय का कहना है कि तकरीबन सभी भर्ती परीक्षाओं में गलत प्रश्न या गलत जवाब की शिकायत हुई है। उनकी तरफ से साक्ष्य भी उपलब्ध कराए जाते हैं तब भी भर्ती संस्थाएं उनमें संशोधन नहीं करतीं। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के कौशल सिंह का कहना है कि पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा के गलत जवाब की बाबत आयोग में 100 से अधिक पन्नों के साक्ष्य उपलब्ध कराए गए हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।