शहर में ई-रिक्शा संचालन को व्यवस्थित करने के लिए महाकुंभ मेले से पहले तैयार योजना अब तक लागू नहीं हो सकी। छह महीने गुजरने के बाद भी यह फाइलों में दबी पड़ी है। नतीजा यह है कि ई-रिक्शा बेतरतीब ढंग से शहर की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इससे यातायात व्यवस्था चरमराई हुई है और यात्रियों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।
प्रशासन ने ई-रिक्शा संचालन को सुचारू बनाने के लिए 32 रूट तय किए थे। उनके लिए कलर कोड भी निर्धारित किए थे। हालांकि, इस योजना पर अब तक अमल नहीं हुआ। ई-रिक्शा यूनियन के अध्यक्ष रघुनाथ द्विवेदी ने आरोप लगाया है कि पुलिस प्रशासन की लापरवाही से यह योजना लागू नहीं हो पाई। अगर रूट का निर्धारण कर दिया जाए तो यात्रियों को सुविधा होगी। प्रदेश के बड़े शहरों वाराणसी और लखनऊ आदि में यह व्यवस्था लागू है और वहां इसका सकारात्मक असर देखा गया है।
यह बना था प्लान
क्रमांक क्षेत्र/ स्थान
पंजीकृत पते वाले ई-रिक्शा
कलर कोड
संचालन सीमा
1 झूंसी क्षेत्र
झूंसी, दारागंज नीला
जिराफ चौराहा, शास्त्री पुल तक
2 नैनी क्षेत्र नैनी
पीला
नैनी पुल (नया व पुराना), लेप्रोसी चौराहा तक
3 फाफामऊ क्षेत्रफाफामऊ, तेलियरगंज, राजापुर
हरा चंद्रशेखर आजाद सेतु, तिकोनिया चौराहा तक
4 धूमनगंज क्षेत्रबमरौली, मुंडेरा, झलवा, राजरूपपुर, धूमनगंज लाल
चौफटका, नेहरू पार्क से अंदर आना प्रतिबंधित
5 शहर क्षेत्र
कटरा, अशोकनगर, बैरहना, जार्जटाउन, सिविल लाइंस, करेली, कालिंदीपुरम सफेद शहर क्षेत्र तक सीमित
यह भी हुआ था तय
-ई-रिक्शा उसी क्षेत्र में चलेंगे जहां वे पंजीकृत हैं।
-शास्त्री पुल, नैनी पुल, पुराना-नया यमुना पुल, चंद्रशेखर आजाद पुल से बाहर के स्टैंड तक केवल उसी क्षेत्र के पंजीकृत ई-रिक्शा जा सकेंगे।
-ई-रिक्शा स्टैंड का चिन्हीकरण नगर निगम, पुलिस और आरटीओ की संयुक्त टीम द्वारा किया जाना था।
योजना बनाई जा चुकी है और इस संबंध में प्रक्रिया जारी है। व्यवस्थागत उपायों पर काम हो रहा है। जल्द ही इसे पूर्ण कर योजना लागू की जाएगी। -नीरज पांडेय, डीसीपी यातायात