इलाहाबाद। ई-रिक्शा संचालकों ने अपने वाहनों का संभागीय परिवहन कार्यालय में रजिस्ट्रेशन न कराने का निर्णय लिया है। चालकों और संचालकों का कहना है कि आरटीओ विभाग ने रजिस्ट्रेशन की भारी भरकम फीस कर दी है। इसके अलावा मुख्य मार्गों में भी ई-रिक्शा चलाने की मनाही है। रविवार को ई-रिक्शा चालक संघ ने सभा कर ऐलान किया कि वे इस मामले में अब मंडलायुक्त से गुहार लगाएंगे। तय हुआ कि 14 सितंबर को इलाहाबाद के ई-रिक्शा चालक जुलूस की शक्ल में मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचेंगे।
बता दें कि ई-रिक्शा चालक नगर निगम को लाइसेंस शुल्क के रूप में 806 रुपये सालाना चुका रहे हैं। इसके बाद आरटीओ ने पंजीकरण के लिए एक सितंबर की तारीख दे दी और पंजीकरण शुल्क 5400 रुपये प्रति सीट निर्धारित किया। अधिकांश ई-रिक्शा चार सीट वाले हैं। इस हिसाब से उन्हें 21600 रुपये सिर्फ रजिस्ट्रेशन के लिए ही देने होंगे। जो ऑटो और विक्रम के रजिस्ट्रेशन से कहीं ज्यादा है। ई-रिक्शा चालक मांग कर रहे हैं कि आरटीओ रजिस्ट्रेशन का वाजिब दाम रखे। क्योंकि ई-रिक्शा भी दो तीन साल में पूरी तरह से खराब हो जाता है।
इस संबंध में रविवार को ई-रिक्शा चालक संघ की सभा विधायक अनुग्रह नारायण सिंह की मौजूदगी में पुष्पराज सिनेमा के पास लीडररोड में हुई। सभा में आरटीओ द्वारा भारी भरकम रजिस्ट्रेशन शुल्क एवं कालोनियों को केंद्र मानकर उसके पांच किलोमीटर के दायरे में चलाने के खिलाफ चर्चा हुई। सभा के आयोजक अली मोहम्मद मंसूरी ने कहा कि नगर निगम की तरह ही आरटीओ प्रशासन साल भर का एकमुश्त रियायती शुल्क ले। सभा में विधायक अनुग्रह नारायण ने कहा कि वे ये मुद्दा विधानसभा में उठाएंगे। इस मौके पर लक्ष्मीकांत मिश्र, इंतेजार अहमद, प्रकाश केसरवानी, हेमंत कुमार अवस्थी, सैयद जाहिद, कुंदन भारतीय, वीरेंद्र शर्मा आदि मौजूद रहे।