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सड़कों की धूल ने बनाया सांस रोगी

Tue, 03 May 2016 02:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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जरूरी न हो तो घर से बाहर निकलने से बचें। बाहर निकलेंगे तो हवा में उड़ रही धूल आपको सांस का रोगी बना सकती है। यकीन नहीं हो रहा है तो चिकित्सकों से पूछ लीजिए। शहर में जबसे सड़कों की खोदाई शुरू हुई है तबसे उनकी ओपीडी में सांस के रोगी बढ़ गए हैं। बच्चों और बुजुर्गों में यह परेशानी ज्यादा हो रही है। शहर के टीबी एवं चेस्ट रोग विशेषज्ञों के मुताबिक शहर में जगह-जगह सड़क और गली खोदने का काम शुरू होने के बाद से अस्पतालों की ओपीडी में सांस के मरीजों की संख्या 10 से 15 फीसदी बढ़ी है। राहत पाने के लिए उन्हें लंबे समय तक दवा का सेवन करना पड़ रहा है।
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शहर में ट्रैफिक एवं छोटे-छोटे उद्योगों से धुआं सहित कई रसायनिक गैसें पहले से ही भारी मात्रा में निकल रही हैं। इससे अस्थमा, हार्ट अटैक, सीने में इंफेक्शन जैसी बीमारियां पहले से ही हो रही हैं, उस पर सड़कों की खोदाई से उड़ रही धूल और मुसीबत बन रही है। इसकी चपेट में सबसे अधिक बच्चे और बुजुर्ग आ रहे हैं। सीएमपी डिग्री कॉलेज रसायन विभाग के डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव कहते हैं कि वायु में कार्बन मोनाडाई ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाईट्रस ऑक्साइड सहित कई खतरनाक गैसें निकल रही हैं। यह सांस के जरिए हवा में प्रवेश कर फेफड़े तक पहुंच जाती हैं। चूंकि यह गैसें ऑक्सीजन से ज्यादा हल्की होती हैं। इसके चलते फेफड़े में जल्दी ही समाहित हो जाते हैं। इससे फेफड़े को ऑक्सीजन की जगह दूसरी गैसें मिलती हैं, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ने के साथ कई दूसरी परेशानियां पैदा होने लगती है।

फेफड़ा रक्त को पूरी तरह से साफ नहीं कर पाता है। धूल के कण श्वांस नलियों के रास्ते से पहुंचकर भारी पन तो लाते हैं। फेफड़े को भी जाम करते हैं। इससे लोगों को सांस संबंधी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। श्वांस नलियों के जाम होने से लोगों को सांस संबंधी परेशानियां भी शुरू हो रही हैं। बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता कम होने से वह सांस की चपेट में जल्दी आ रहे हैं। टीबी एवं चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष टंडन कहते हैं कि उनकी ओपीडी कुछ महीनों से सांस के रोगियों से बढ़ गई है। इसकी वजह मुख्य रूप से वायु प्रदूषण हैं। धूल एक प्रमुख कारण है। उन्होंने बताया कि कई मरीज तो ऐसे हैं जो लगातार वायु प्रदूषण की चपेट में आकर दमा के मरीज हो रहे हैं। उन्हें लगातार इनहेलर लेना पड़ रहा है। उधर, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के टीबी एवं चेस्ट रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. तारिक महमूद भी ऐसी बातों की पुष्टि कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे बचने के लिए लोगों को मुंह पर कपड़े लगाना बेहतर होगा। 
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