उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के नाम पर फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनवाने का मामला सामने आया है। ये खेल कई राज्यों में चल रहा है, जिसका खुलासा वेरिफिकेशन के लिए आई मार्कशीट की जांच के बाद हुआ। मुविवि प्रशासन की ओर से सोरांव थाने में इस तरह के नौ मामलों में एफआईआर लिखाई गई है। साथ में ऐसे गिरोह के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
मुविवि की फर्जी मार्कशीट और डिग्री को लेकर शिकायत जनवरी में हुई थी। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा की ओर से मुविवि को पत्र लिखकर इसके प्रति आगाह किया गया था। विगत कुछ दिनों में मुविवि के नाम पर फर्जी डिग्री के कई मामले सामने आए। गौर करने वाली बात ये है कि जालसाजों ने पीएचडी की भी फर्जी डिग्री बना ली है। एमए, बीबीए और पीएचडी की छह फर्जी डिग्री-मार्कशीट के मामले में मुविवि की ओर से एफआईआर लिखाई गई है। इसके अलावा तीन मामले ऐसे भी हैं जिनकी नामांकन संख्या सही है, लेकिन छात्र-छात्रा के नाम गलत हैं। यानी, जालसाजों ने सही नामांकन संख्या के नाम पर फर्जी डिग्री बनवा ली। इनके खिलाफ भी एफआईआर लिखाई गई है। मुविवि के कुलपति प्रो. एमपी दुबे ने बताया कि इस तरह के गोरखधंधे उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली समेत कई राज्यों में चल रहे हैं। उन्होंने शासन समेत अन्य संबंधित लोगों को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई के लिए कहा है।
मुविवि की प्रायोगिक परीक्षाएं आठ से
मुविवि के सत्र जून-2016 की प्रायोगिक परीक्षाएं आठ जुलाई से शुरू होंगी। विस्तृत जानकारी मुविवि की वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है। कुलपति प्रो.एमपी दुबे ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न केंद्रों पर परीक्षा 17 जुलाई तक चलेगी। मुविवि की लिखित परीक्षाएं पांच जुलाई को संपन्न हो जाएंगी। पहली बार सामूहिक नकल की शिकायत पर पांच परीक्षा केंद्र ही निरस्त कर दिए गए। 200 से अधिक नकलचियों को भी पकड़ा गया है।