बीएचएस के छात्र को टक्कर मारने वाला ड्राइवर गिरफ्तार
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अवनीश यादव है जेल में, ड्राइवर के पास थी गाड़ी
पिता की तहरीर पर दर्ज हुई एफआईआर
प्रयागराज। कैंट थाना क्षेत्र के पोलो ग्राउंड के पास बीएचएस के छात्र आदित्य भार्गव को टक्कर मारने के आरोपी हैदर अली को गिरफ्तार कर लिया गया। वह छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष अवनीश यादव की स्कार्पियो चला रहा था। आदित्य के पिता की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। अवनीश इस समय जेल में बंद है। पुलिस का कहना है कि हैदर गाड़ी में अकेले था।
लूकरगंज के रहने वाले व्यवसायी संदीप भार्गव का बेटा आदित्य भार्गव (17) बीएचएस में कक्षा 11 का छात्र था। रविवार की शाम वह स्कूटी से दोस्तों से मिलने जा रहा था। पोलो ग्राउंड के पास अनियंत्रित स्कार्पियो ने आदित्य को टक्कर मार दी। हादसा इतना जबर्दस्त था कि आदित्य उछलकर कई मीटर दूर जा गिरा। उसे एसआरएन अस्पताल भेजा गया जहां उसकी मौत हो गई। घटना के बाद स्कार्पियो एक पेड़ से टकरा गई। टक्कर मारने के बाद आरोपी स्कार्पियो चालक गाड़ी छोड़कर भाग निकला था। पुलिस मौके पर पहुंची स्कार्पियो को सीज कर दिया। गाड़ी पर ‘छात्रसंघ अध्यक्ष इविवि’ लिखा हुआ था। नंबर के आधार पर पता चला कि गाड़ी छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष अवनीश यादव की है। कैंट एसओ एसके द्विवेदी को सुबह जानकारी मिली कि अवनीश जेल में है। उसके करीबियों ने बताया कि गाड़ी धूमनगंज के नीमसराय का रहने वाला हैदर अली ले गया था। पुलिस ने दिन में हैदर को गिरफ्तार कर लिया। एसओ ने बताया कि हैदर घटना के समय अकेला था। इससे पहले आदित्य के पिता संदीप भार्गव की तहरीर पर पुलिस ने स्कार्पियो चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली थी।
पोस्टमार्टम के बाद हुआ अंतिम संस्कार
प्रयागराज। आदित्य के शव का देर रात ढाई बजे के बाद पोस्टमार्टम कराया गया। रात में पोस्टमार्टम हाउस पर बड़ी संख्या में डाक्टर और वकील पहुंच गए थे। प्रशासनिक अधिकारियों से बात की गई। डीएम की अनुमति के बाद रात में ही पोस्टमार्टम कराने का निर्णय ले लिया गया।
घर पर सांत्वना व्यक्त करने वालों का तांता
प्रयागराज। आदित्य के शव का सोमवार की सुबह अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में बीएचएस के छात्रों के अलावा डाक्टर, वकील तथा अन्य लोग पहुंचे थे। दिन में घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। मां अंजली और पिता संदीप के आंसू नहीं सूख रहे थे। सांत्वना देने वालों की भी आंखें भर आ रही थीं।