जिलाधिकारी अलीगढ़ के आदेश में कफील के भाषण को दो समुदायों के बीच घृणा फैलाने और लोक शांति को भंग करने वाला माना गया है। कोर्ट का कहना था कि इसमें संदेह नहीं है कि भाषण के जिन अंशों पर कार्रवाई की गई है वह डा. कफील के भाषण का हिस्सा थी। मगर वह अलग संदर्भ में हैं। निश्चित रूप से वक्ता ने सरकार की नीतियों का विरोध किया है और ऐसा करते समय उन्होंने कुछ उदाहरण भी दिए हैं। मगर इससे ऐसा कुछ जाहिर नहीं होता जिससे उनकी निरुद्धि की आवश्यकता हो।
जेल से रिहा हुए डॉक्टर कफील खान
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कोर्ट ने कहा कि पूरा भाषण से प्रथम दृष्टया यह नहीं पता चलता कि भाषण घृणा या हिंसा फैलाने के लिए दिया गया था। इसमें कही भी अलीगढ़ शहर की शांति भंग करने वाली बात है। भाषण में राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए नागरिकों का अह़वान किया गया है। कोर्ट ने कहा ऐसा लगता है डीएम अलीगढ़ ने भाषण के कुछ हिस्सों को पढ़ा और उन्हीं को आधार बनाकर कार्रवाई की है।
उन्होंने पूरे वक्तव्य की मूल भावना को नजरअंदाज किया है। कोर्ट ने कहा कि पूरा भाषण मुकदमे के ट्रायल का विषय है जो कफील खान के विरुद्ध लंबित है इसलिए हमारा इस पर अधिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। हमारी नाराजगी सिर्फ इतनी है कि क्या एक वास्तविक व्यक्ति को इस प्रकार से निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए जिस पर प्रकार से डीएम अलीगढ़ पहुंचे हैं।