इलाहाबाद। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग के यूरोलॉजिस्ट डॉ.दिलीप चौरसिया को निलंबित कर दिया गया है जबकि गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ.मनीषा द्विवेदी की संविदा को समाप्त कर दिया गया है। दोनों डॉक्टर्स को आपातकालीन सेवा संरक्षण अधिनियम के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम करने का दोषी पाया गया है। मामले में डॉ.दिलीप और डॉ.मनीषा सहित शहर के कुल नौ डॉक्टर्स के खिलाफ प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। मामले की जांच की जिम्मेदारी कमिश्नर बीके सिंह को सौंपी गई है। मामले का निस्तारण होने तक डॉ. दिलीप चौरसिया, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा कार्यालय से संबद्ध रहेंगे।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव राज प्रताप सिंह की ओर से जारी आदेश के मुताबिक दोनों डॉक्टर्स ने डॉ.रोहित गुप्ता के साथ हुई मारपीट के मामले में इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर निजी चिकित्सकों की ओर से की गई हड़ताल में शामिल होकर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाया था। इसमें शहर के कुल नौ डॉक्टरों के विरुद्ध प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। दोनों डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज की सेवाओं में व्यवधान और एस्मा (आवश्यक सेवा संरक्षण अधिनियम) का उल्लंघन किया। इसके मद्देनजर तीस जून से संविदा पर तैनात डॉ.मनीषा द्विवेदी की संविदा खत्म करने सहित डॉदिलीप को निलंबित किया गया है। मामले के निस्तारण तक डॉ.दिलीप को महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। मंडलायुक्त पूरे मामले की जांच करके रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे।
डीएम की रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रमुख सचिव की ओर से जारी आदेश में डॉ.दिलीप चौरसिया पर कई और आरोप लगाए गए हैं। हाईकोर्ट इलाहाबाद के आदेश का हवाला देते हुए बीते वर्ष कमिश्नर की ओर से कराई गई जांच का जिक्र किया गया है। कहा गया है कि डॉ.दिलीप प्राइवेट प्रैक्टिस करते और नर्सिंग होम संचालित करते हैं। इतना ही नहीं डॉ.दिलीप ने डॉक्टरों को हड़ताल के लिए भी उकसाया। उन्हें इस शर्त पर जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा कि वह किसी अन्य रोजगार से नहीं जुड़े हैं। बता दें, डॉ. रोहित के साथ 13 अप्रैल की रात में कचहरी के पास स्थित आनंद हॉस्पिटल में मरीज वीरेंद्र जायसवाल की मौत के बाद परिजनों ने मारपीट की थी। घटना से आक्रोशित शहर के डॉक्टरों ने आंदोलन शुरू किया जिसमें डॉ.मनीषा द्विवेदी, डॉ. दिलीप चौरसिया भी शामिल हुए।