बकौल संदीप, पत्नी के दिवंगत होने के बाद दोनों बच्चों को संभालते हुए बमुश्किल गुजारा हो रहा है। इसी कारण लखनऊ के डॉक्टरों ने कई तरह की जांच लिख दीं, जिसे वह नहीं करा पाए। बच्चे का पेट भी दिनों-दिन फूलने लगा। सात महीने का होने पर बच्चे को सांस लेने में दिक्कत आने लगी। वह कुछ खा-पी भी नहीं रहा था, इसलिए उसका वजन भी लगातार घटने लगा। संदीप उसे दिखाने लखनऊ स्थित पीजीआई गए, लेकिन पैसे के अभाव में जांच फिर नहीं करा सके। इलाज भी शुरू नहीं हो सका।
कुछ लोगों की सलाह पर संदीप एक हफ्ते पहले मनु को सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय (चिल्ड्रेन अस्पताल) दिखाने पहुंचे। डॉक्टरों को बच्चे के पेट में ट्यूमर होने की आशंका हुई। उसका अस्पताल में सीटी स्कैन कराने से पता लगा कि बच्चे के पेट में भ्रूण है। इसके बाद शुक्रवार को डॉ. डी कुमार, डॉ. नीतू और डॉ. अरविंद यादव की टीम ने चार घंटे तक ऑपरेशन करके बच्चे के पेट से भ्रूण को निकाला। डॉ. कुमार के मुताबिक बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है। वह डॉक्टरों की सघन निगरानी में है। उसे अस्पताल के पीकू वार्ड में भर्ती कराया गया है।
दो जाइगोट बनने से होती है ऐसी स्थिति
ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक डॉ. डी. कुमार बताते हैं कि शुक्राणु और अंडाणु मिलकर दो जाइगोट बनने से ऐसी परिस्थिति बनती है। पहले जाइगोट से बच्चा बनता है और दूसरा बच्चे के पेट में चला जाता है। पेट में यह भ्रूण ट्यूमर की तरह बढ़ने लगता है। इस स्थिति को ही फीटस इन फीटू कहते हैं। अगर दूसरा जाइगोट बच्चे के शरीर से बाहर यानी मां के पेट में बनता-पलता है तो वह जुड़वां बच्चे का रूप हो जाता है।