टीईटी 2017 में गलत ओएमआर शीट भरने वाले 72876 अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट की खंडपीठ से भी झटका लगा है। एकल न्यायपीठ के आदेश को सही मानते हुए खंडपीठ ने अभ्यर्थियों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने मामूली गलतियां करने के बाद उसे मानवीय त्रुटि के आधार पर सुधारने का मौका देने की दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत का मानना था कि भावी शिक्षकों से ऐसी गलतियों की अपेक्षा नहीं की जा सकती है।
जयकरन सिंह और 52 अन्य तथा दर्जनों अन्य विशेष अपीलों पर न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति नीरज तिवारी की पीठ ने सुनवाई की। अपील में एकल न्यायपीठ के 29 जनवरी 2018 के निर्णय को चुनौती दी गई थी। याचीगण का कहना था कि वे टीईटी 2017 में शामिल हुए थे। ओएमआर शीट में दिए गए निर्देशों के अनुसार पंजीकरण संख्या, अनुक्रमांक और भाषा चयन आदि में कुछ गलतियां हुईं, जिससे उनका परिणाम जारी नहीं किया गया। अधिवक्ता की दलील थी कि याचीगण द्वारा की गई गलतियां मानवीय त्रुटि हैं और उसे सुधारने का मौका दिया जाना चाहिए। मांग की गई कि कॉपियों का मूल्यांकन मैन्युअली किया जाए तथा उनका परिणाम घोषित किया जाए।
अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता बिपिन बिहारी पांडेय और स्थायी अधिवक्ता मीनाक्षी सिंह ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि विज्ञापन लेकर प्रवेशपत्र जारी करने और ओएमआर शीट पर स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि ओएमआर को किस प्रकार से भरना है। यह भी बताया गया था कि ओएमआर भरने में गलती होने पर कंप्यूटर द्वारा कॉपियां जांचना संभव नहीं होगा।
इतने स्पष्ट निर्देशों और आसान तरीकों के बावजूद याचीगण जोकि भावी शिक्षक हैं और जिन पर अगली पीढ़ी को शिक्षित करने की जिम्मेदारी आने वाली है ओएमआर में भरने में गलतियां कर रहे हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि याचीगण द्वारा की गई गलतियां मामूली नहीं हैं। याचीगण परिपक्व छात्र हैं और शिक्षक बनने के लिए आए हैं और उनको ओएमआर शीट भरने के निर्देशों को सावधानी से पढ़ना चाहिए था। कोर्ट ने अपीलों खारिज कर दी हैं।