एमएनएनआईटी की ओर से विकसित अमृत एप कोरोना संदिग्धों की पहचान में मदद करेगा। मंगलवार को डीएम भानुचंद गोस्वामी ने एप को लांच किया। डीएम ने कहा कि इस एप को विकसित करने के लिए जिला प्रशासन एमएनएनआईटी के संपर्क में था। एमएनएनआईटी के निदेशक और उनकी टीम ने एप का विकास करके कोरोना संदिग्धों की पहचान करने में बड़ी पहल की है।
डीएम ने बताया कि अमृत (असेसमेंट, मॉनिटरिंग, रिपोर्टिंग और इंटेलिजेंट ट्रैकिंग) एक मोबाइल ऐप है, जो केमिस्ट शॉप, मेडिकल प्रैक्टिशनर और अन्य संगठनों की सहायता से संदिग्ध कोरोना रोगियों के बारे में आसानी से प्रशासन, कोरोना कंट्रोल रूम को जानकारी देने में मदद करेगा। एप्लिकेशन के एडमिन पैनल में सभी पंजीकृत कार्यालय, अस्पताल, नर्सिंगहोम आदि के रोगियों या ग्राहकों, दवा दुकानों, चिकित्सकों और अन्य संगठनों के बारे में रिकॉर्ड और जानकारी रखी जाएगी। इसमें आशा कार्यकर्ता पंजीकरण की सुविधा भी है। एप को कंट्रोल रूम को आसानी से सूचना भेजने में आशाओं/आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद करने के लिए डिजाइन किया गया है।
इस दौरान सीएमओ डॉ. बाजपेयी ने बताया कि हमें उम्मीद है कि अमृत एप नर्सिंग होम, दवा की दुकानों और आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से कोरोना संदिग्धों को ट्रैक करने में प्रशासन के लिए मददगार होगा। वहीं एमएनएनआईटी के निदेशक प्रो.राजीव त्रिपाठी ने कहा कि यह एप सामुदायिक स्तर पर कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए एक अत्यंत प्रासंगिक और एक शक्तिशाली माध्यम साबित होगा। आईपीआर सेल की चेयरपरसन प्रो. गीतिका ने बताया कि हमने अमृत ऍप के आईपीआर संरक्षण के लिए आवेदन कर किया है। इस मौके पर संस्थान के रजिस्ट्रार डॉ. डॉ. सर्वेश कुमार तिवारी और अमृत टीम के सदस्य भी मौजूद थे।