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प्रयागराज : 21 साल बाद देरी माफी के पर्याप्त कारण के बिना रद्द नहीं होगी तलाक की डिक्री

Thu, 10 Sep 2026 04:27 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि एकपक्षीय तलाक की डिक्री को 21 साल बाद चुनौती देने पर केवल आवेदन दाखिल कर देने से देरी स्वत: माफ नहीं मानी जा सकती।
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अदालत का आदेश - फोटो : istock
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि एकपक्षीय तलाक की डिक्री को 21 साल बाद चुनौती देने पर केवल आवेदन दाखिल कर देने से देरी स्वत: माफ नहीं मानी जा सकती। अदालत को पहले देरी के पर्याप्त व संतोषजनक कारण, समन की विधिवत तामील के सवाल पर निर्णय करना होगा।

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इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने बलिया परिवार न्यायालय का आदेश निरस्त कर मामले को नए सिरे से तय करने के लिए कहा है। लल्लू राम और शिव कुमारी देवी की शादी 1981 में हुई थी। लल्लू राम ने तलाक का मुकदमा दाखिल किया था। शिव कुमारी के अदालत में उपस्थित न होने पर दिसंबर 1990 को एकपक्षीय तलाक की डिक्री पारित हुई।

शिव कुमारी ने करीब 21 साल बाद 2011 में आदेश नौ नियम 13 सीपीसी के तहत आवेदन दाखिल कर डिक्री रद्द करने की मांग की। परिवार न्यायालय ने नवंबर 2019 को उनका आवेदन स्वीकार कर तलाक की डिक्री निरस्त कर दी थी। इस फैसले को लल्लू ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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कोर्ट ने पाया कि परिवार न्यायालय ने देरी के कारणों पर कोई स्पष्ट निष्कर्ष दर्ज नहीं किया। साथ ही यह भी नहीं जांचा कि 1990 में शिव कुमारी को मुकदमे का समन कानून के अनुसार तामील हुआ था या नहीं। कोर्ट ने दोनों आवेदनों को बहाल करते हुए परिवार न्यायालय को अधिकतम दो माह में नए सिरे से निर्णय लेने का आदेश दिया है। 

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