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जिला जज की रिपोर्ट : गाजियाबाद के डीसीपी ने नहीं माना कोर्ट का आदेश, अदालत में पेश हलफनामा झूठा

Fri, 04 Oct 2024 03:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

डीसीपी की ओर से एक सितंबर को हलफनामा दाखिल किया गया। इसमें बताया कि कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए याची को बहाल कर दिया गया है। वहीं, प्रतिवाद करते हुए याची के अधिवक्ता प्रभाकर अवस्थी ने दावा किया कि डीसीपी ने याची को बहाल नहीं किया है।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में निलंबित उपनिरीक्षक की बहाली को लेकर गाजियाबाद ट्रांस हिंडन के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) ने कोर्ट में झूठा हलफनामा दाखिल किया था। खफा कोर्ट ने इसे आदेश की अवहेलना मानते हुए डीसीपी के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की संस्तुति कर दी। वहीं, अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट से आदेश के अनुपालन की मोहलत मांगी।

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उन्होंने आश्वासन दिया है कि डीसीपी निलंबित उपनिरीक्षक की बहाली का आदेश पारित कर कोर्ट में अनुपालन हलफनामा दाखिल करेंगे। कोर्ट ने मामले की सुनवाई चार अक्तूबर तक के लिए स्थगित कर कहा कि डीसीपी निमिष दशरथ पाटिल सुनवाई के वक्त कोर्ट में हाजिर रहेंगे। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की अदालत ने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट के निलंबित उपनिरीक्षक जितेंद्र कुमार दीक्षित की याचिका पर दिया है। इससे पहले कोर्ट ने याची जितेंद्र के निलंबन पर रोक लगाते हुए बहाली का आदेश दिया था। याची को बहाल कर डीसीपी से व्यक्तिगत हलफनामा भी मांगा था।

डीसीपी की ओर से एक सितंबर को हलफनामा दाखिल किया गया। इसमें बताया कि कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए याची को बहाल कर दिया गया है। वहीं, प्रतिवाद करते हुए याची के अधिवक्ता प्रभाकर अवस्थी ने दावा किया कि डीसीपी ने याची को बहाल नहीं किया है। कोर्ट के आदेश को कागजी कार्यवाही बताकर डीसीपी ने याची को काम नहीं करने देने की धमकी भी दी है।

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बहाली का लिखित आदेश नहीं किया गया था पारित

खफा कोर्ट ने याची की ओर से डीसीपी पर लगाए आरोपों की जांच के लिए जिला जज गाजियाबाद की अध्यक्षता में कमीशन जारी कर रिपोर्ट तलब की थी। इसमें डीएम गाजियाबाद और पुलिस आयुक्त को भी जिला जज के पुलिस लाइंस में निरीक्षण के दौरान मौजूद रहने का आदेश दिया था।

बृहस्पतिवार को जिला जज की रिपोर्ट अदालत में पेश हुई। इसमें कोर्ट ने पाया कि हाईकोर्ट के आदेश से निलंबन रद्द होने के बाद याची से पुलिस लाइन का कार्य तो लिया जा रहा था, लेकिन आदेश के अनुपालन में बहाली का कोई लिखित आदेश पारित नहीं किया गया था। डीसीपी ने याची को बहाल करने का झूठा हलफनामा कोर्ट में दाखिल किया था।

कोर्ट ने इसे हाईकोर्ट के दिए गए आदेश की जानबूझकर अवहेलना माना। कहा कि डीसीपी निमिष दशरथ पाटिल का यह आचरण अदालत के आदेश की स्पष्ट अवमानना है। अदालत अवमानना कार्यवाही के लिए मामला संबंधित पीठ को संदर्भित करने के मूड में है। इसी बीच अपर महाधिवक्ता एम.सी.चतुर्वेदी ने याची को बहाल करने का आदेश पारित कर डीसीपी का अनुपालन हलफनामा दाखिल करने की मोहलत मांगी। इस पर कोर्ट ने सुनवाई को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया।
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