बहाली का लिखित आदेश नहीं किया गया था पारित
खफा कोर्ट ने याची की ओर से डीसीपी पर लगाए आरोपों की जांच के लिए जिला जज गाजियाबाद की अध्यक्षता में कमीशन जारी कर रिपोर्ट तलब की थी। इसमें डीएम गाजियाबाद और पुलिस आयुक्त को भी जिला जज के पुलिस लाइंस में निरीक्षण के दौरान मौजूद रहने का आदेश दिया था।
बृहस्पतिवार को जिला जज की रिपोर्ट अदालत में पेश हुई। इसमें कोर्ट ने पाया कि हाईकोर्ट के आदेश से निलंबन रद्द होने के बाद याची से पुलिस लाइन का कार्य तो लिया जा रहा था, लेकिन आदेश के अनुपालन में बहाली का कोई लिखित आदेश पारित नहीं किया गया था। डीसीपी ने याची को बहाल करने का झूठा हलफनामा कोर्ट में दाखिल किया था।
कोर्ट ने इसे हाईकोर्ट के दिए गए आदेश की जानबूझकर अवहेलना माना। कहा कि डीसीपी निमिष दशरथ पाटिल का यह आचरण अदालत के आदेश की स्पष्ट अवमानना है। अदालत अवमानना कार्यवाही के लिए मामला संबंधित पीठ को संदर्भित करने के मूड में है। इसी बीच अपर महाधिवक्ता एम.सी.चतुर्वेदी ने याची को बहाल करने का आदेश पारित कर डीसीपी का अनुपालन हलफनामा दाखिल करने की मोहलत मांगी। इस पर कोर्ट ने सुनवाई को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया।