prayagraj news : काला पड़ा गंगाजल।
- फोटो : prayagraj
निरीक्षण के लिए टीम गठित
गंगा प्रदूषण मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा तथा न्यायमूर्ति अजित कुमार की पूर्णपीठ ने प्रयागराज में गंगा यमुना मे सीधे गिर रहे नालों एवं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थिति का मौका मुआयना कर रिपोर्ट पेश करने के लिए अधिवक्ताओं की टीम गठित की है।तथा जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को इन्हे सहयोग प्रदान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट द्वारा गठित समिति में न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता अरूण कुमार गुप्ता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ता डा. एच एन त्रिपाठी, केन्द्र सरकार के अधिवक्ता राजेश त्रिपाठी व राज्य सरकार के अधिवक्ता मनु घिल्डियाल शामिल है।जिन्हें शहर के नालों व एस टी पी की अद्यतन स्थिति पर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।
prayagraj news :Pollution
- फोटो : prayagraj
प्राइवेट एजेंसियां कैसे रोक रही प्रदूषण
कोर्ट को बताया गया कि जिन नालों को सीवेज से नहीं जोड़ा गया है उनका दूषित जल बायो रेमिडियल तकनीक से शोधित किया जाता है। इसकी जिम्मेदारी प्राइवेट एजेंसियों को दी गई है। इस कोर्ट ने नगर आयुक्त प्रयागराज को बायो -रेमेडियेशन तकनीक के जरिए शोधन करने वाली प्राइवेट एजेन्सियों के साथ हुए करार की प्रति तथा अब तक किए गए भुगतान का ब्यौरा पेश करने का निर्देश दिया है पूछा है कि इनकी मानीटरिंग कैसे की जा रही है। नालों के शोधन के लिए ये माइक्रोवेल कंसोर्टिया की कितनी मात्रा मिला रहे है।हालांकि कि याची अधिवक्ता ने इसे पेपर वर्क करार देते हुए कहा कि कोई शोधन नही किया जा,रहा, गंदे नाले सीधे गंगा यमुना मे गिर रहे है।
कोर्ट ने याची अधिवक्ता को इस पर विशेषज्ञों की रिपोर्ट पेश करने की छूट दी है कि क्या बायो रेमेडियेशन गंदे नाले शोधित करने में उपयोगी तकनीक है।
कब तक एसटीपी से जुड़ेंगे सभी नाले कोर्ट ने राज्य सरकार से अपर सचिव रैक के अधिकारी के हलफनामे के साथ यह बताने का निर्देश दिया है कि प्रयागराज में बचे 42नालों को कितने समय में एसटीपी से जोड़ देंगे।साथ ही यह भी बताएं कि कितने एसटीपी सही काम कर रहे हैं और कितने नाले बिना शोधित सीधे गंगा यमुना में गिर रहे है। कोर्ट ने नगर आयुक्त नगर निगम प्रयागराज व मेला प्रभारी माघ मेला प्रयागराज से पूछा है कि पालीथिन पर प्रतिबंध की राज्य सरकार द्वारा जारी 15जुलाई 18 की अधिसूचना का पालन कैसे कराया जा रहा है।क्या कदम उठाए गए हैं। कितना जुर्माना वसूला गया और कितने के खिलाफ अभियोग चलाया गया है।