इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पैरवी की रसीद की अनदेखी करते हुए पारित अधीनस्थ अदालत के आदेश को रद्द कर मामले को दोबारा विचार के लिए निचली अदालत भेज दिया है। आदेश दिया है कि संबंधित आवेदन पर दो सप्ताह में नया आदेश पारित किया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने मथुरा निवासी हरिमोहन सैनी की याचिका पर दिया।
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हरिमोहन सैनी ने आरोप लगाया था कि उनकी भूमि पर कुछ लोगों की ओर से अवैध निर्माण कराया जा रहा है। इसे रोकने के लिए उन्होंने मथुरा की सिविल जज के अदालत में स्थायी निषेधाज्ञा का वाद दायर किया था। अदालत ने वादी के पक्ष में अंतरिम राहत का आदेश दिया था।
19 जनवरी 2026 को अदालत ने प्रस्तुत सर्वे रिपोर्ट को निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि वादी की ओर से आवश्यक कदम उठाने पर पुनः सर्वे कमिश्नर की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। याची का कहना था कि उसने 19 फरवरी 2026 को 1500 रुपये जमा कर पुनः सर्वे रिपोर्ट के लिए आवश्यक पैरवी की, जिसकी रसीद भी रिकॉर्ड पर थी। इसके बावजूद निचली अदालत ने इस तथ्य की अनदेखी करते हुए 29 मई 2026 को आवेदन को खारिज कर दिया।