इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीएसी कांस्टेबल की बर्खास्तगी का एकपक्षीय आदेश रद्द कर दिया हैै। कोर्ट ने कहा है कि कांस्टेबल को कोई कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया और न ही उसे सफाई देने का मौका दिया गया । ऐसे में चयन निरस्त करना अनुच्छेद 14 एवं नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन ह्रै। ऐसा आदेश पूर्णतया अवैध एवं मनमाना पूर्ण है। कोर्ट ने कांस्टेबल का चयन निरस्त करने के पीएसी कमांडेंट प्रयागराज के 30 नवंबर 2019 को पारित आदेश को रद्द कर दिया है और नियमानुसार वैधानिक कार्यवाही की छूट दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने पीएसी कांस्टेबल संजय यादव की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता निर्विकल्प पांडेय ने बहस की।याची 30 नवंबर 2019 को चित्रकूट जिला जेल में तैनात था। उसके खिलाफ बाल गोविंद सिंह ने एक शिकायत की कि उसने गलत जन्मतिथि के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की है। शिकायत में कहा गया कि याची ने वर्ष 2005 में बौरहवा बाबा इंटर कॉलेज गाजीपुर से हाईस्कूल पास किया है। उसकी जन्म तिथि एक जुलाई 1990 है। इसके बाद शांति निकेतन इंटर कॉलेज गाजीपुर से इंटरमीडिएट भी पास किया और जन्मतिथि यही रही है।
याची पर आरोप है कि उसने 2013 में दुबारा माता रश्मि देवी बालक बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय बथुआ गोदाम मऊ से हाईस्कूल की परीक्षा दी। वहां उसकी जन्मतिथि 10 जुलाई 1996 दर्ज है। 2015 में इंटरमीडिएट परीक्षा भी पास की और उसमें भी उसकी जन्म तिथि 10 जुलाई 1996 दर्ज है। प्रारंभिक जांच में याची का बयान लिया गया लेकिन उसे सफाई का कोई मौका नहीं दिया गया। याची का कहना है कि उसने मऊ से पढ़ाई की है। गाजीपुर के प्रमाणपत्र में पिता का नाम भिन्न है। मऊ के प्रमाणपत्र में उसके पिता का नाम दर्ज है। गलत शिकायत की गई है। उसे सफाई का मौका नहीं दिया गया है।