अधिकांश लोग माइग्रेन को ब्रेन की समस्या मानते हैं। जबकि आयुर्वेद में माइग्रेन का संबंध पाचन तंत्र में गड़बड़ी या फिर बढ़े हुए पित्त से है। सुबह खाली पेट रहने या बाहर के तले भुने भोजन का सेवन अधिक करने से पित्त के बढ़ने की संभावना रहती है। जिससे सिर में टपकन की तरह दर्द और उल्टी अधिक लगती है।
दर्द की दवा के बाद भी नहीं मिला आराम
चौक क्षेत्र की 40 वर्षीय लीना को लंबे समय से माइग्रेन की समस्या थी। पहले दर्द निवारक दवा के सेवन से उन्हें आराम मिल रहा था। मगर कुछ समय बाद उन्हें दर्द निवारक दवा खाने के बाद भी आराम नहीं मिला। जिसके बाद उन्होंने आयुर्वेद पद्धति से उपचार कराने का निर्णय लिया। इस दौरान उनका पित्त बढ़ा हुआ पाया गया। फिलहाल आठ महीने के उपचार से उन्हें काफी आराम है।
पेट में जलन के साथ सिर दर्द रहता था
अल्लापुर निवासी 42 वर्षीय सरिता को पेट में जलन के साथ सिर दर्द की शिकायत थी। इलाज भी हुआ लेकिन आराम न मिलने पर उन्होंने आयुर्वेद से उपचार कराना शुरू किया। वहीं करीब छह महीने के उपचार में सरिता के खानपान को ठीक करने के साथ दवाईयां चलाई गई।
पाचन तंत्र और माइग्रेन में सीधा संबंध होता है। इसलिए पेट से जुड़ी समस्या को कभी नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। घर का खाना व खाली पेट न रहने से माइग्रेन नहीं होता है।
-वैद्य एसके राय, आयुर्वेदाचार्य।