Prayagraj News : माघ मेले में आयोजित धर्मसंसद में हिस्सा लेते साधु-संत।
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नरसिंहानंद और जितेंद्र नारायण की रिहाई की मांग
संतों ने चेताया कि अगर दोनों धर्म गुरुओं को जल्द जेल से रिहा नहीं किया गया तो देशव्यापी प्रदर्शन होगा। सम्मेलन में पारित तीनों प्रस्तावों को केंद्र सरकार तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया। संतों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनके सम्मेलन को रोकने की भरपूर कोशिश की, इसके बावजूद देश के कोने-कोने से साधु -संत सम्मेलन में पहुंचे।
हरिद्वार से आए स्वामी कृष्ण शास्त्री महाराज ने कहा कि इससे पहले हरिद्वार में हुई धर्म संसद में भी भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया गया था। इसी निर्णय के बाद धर्म संसद कोर कमेटी के सदस्य महामंडलेश्वर यति नरसिम्हानंद गिरि महाराज को प्रशासन ने गिरफ्तार कर उनको जेल भेज दिया। इतना ही नहीं नरसिम्हानंद गिरि के सानिध्य में हिंदू धर्म स्वीकार करने वाले वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी ने जब इस मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद की, तो उनको भी जेल में डाल दिया गया।
Prayagraj News : माघ मेले में आयोजित धर्मसंसद में शामिल साधु-संत।
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मोदी और योगी के कार्यों की सराहना की
इसे संत समाज किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं कर सकता। धर्म संसद के संयोजक स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि अब यह कारवां रुकने वाला नहीं है। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन का उद्देश्य हिंदू राष्ट्र के निर्माण में संतों की भूमिका तय करनी है। इनके बाद पवन कृष्ण शास्त्री ने भी हिंदू राष्ट्र के मुद्दे को जोरशोर से उठाया। उन्होंने बताया कि इसके लिए देश भर में धर्म संसद और संत सम्मेलनों के जरिए वातावरण बनाया जा रहा है। अब देश के हर कोने में धर्म संसद होगी। ताकि, सनातनी हिंदू समाज जाग उठे और देश को हिंदू राष्ट्र बनाने में मदद करें।
सम्मेलन में केंद्र की नरेंद्र मोदी और प्रदेश की योगी सरकार के कामकाज की सराहना की गई। संत सम्मेलन में काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर प्रबोधानंद, अमृतानंद, स्वामी सागर सिंधुराज, स्वामी ताड़केशरण, भैरव दास महाराज, मुरारी बापू महाराज, पवन कृष्ण शास्त्री महाराज एसमेत कई संत मौजूद रहे। अध्यक्षता जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरि ने की।
योगी को ही फिर सीएम के रूप में देखना चाहते हैं साधु-संत
धर्म संसद में आए संतों ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ को ही बनना चाहिए। उनका कहना था कि जिस तरीके से धर्म का प्रचार योगी आदित्यनाथ की सरकार में हुआ, उतना किसी भी सरकार में नहीं हुआ। ऐसे में संत सम्मेलन में यह भी निर्णय हुआ कि जरूरत पड़ने पर संत योगी आदित्यनाथ के लिए घर-घर संपर्क अभियान भी चलाएंगे।
धर्म संसद में धर्म गुरुओं की रिहाई के लिए एसेंबली कांड जैसे आंदोलन की चेेतावनी
प्रशासन की सख्ती के बाद माघ मेले में जहां धर्म संसद की जगह आयोजन का नाम संत सम्मेलन करना पड़ा, वहीं मंच से विवादित बयान भी देने से संत पीछे नहीं रहे। छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड के बाद संगम की रेती पर शनिवार को हुई धर्म संसद में भी आयोजक स्वामी आनंद स्वरूप ने भड़काऊ भाषण देकर माहौल गरमा दिया। उन्होंने एलान किया कि अगर स्वामी यति नरसिम्हानंद और जितेंद्र त्यागी को जेल से रिहा नहीं किया गया तो खतरनाक अंजाम भुगतने होंगे। उन्होंने आदाजी की लड़ाई के दौरान असेंबली कांड जैसे हालात पैदा करने की भी चेतावनी दी।
हालांकि संगम तट के पास धर्म संसद की जगह नाम बदलकर संत सम्मेलन के रूप में हुए इस आयोजन से बड़े संतों ने दूरी बनाए रखी। राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य जगद्गुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को मुख्य अतिथि बनाया गया था, लेकिन वह इंतजार के बाद भी इस सम्मेलन में शामिल नहीं हुए। उनका कोई प्रतिनिधि भी नहीं गया। इस दौरान स्वामी आनंद स्वरूप ने प्रशासन को चेताया कि हफ्ते भर में नरसिम्हानंद और वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण त्यागी को जेल से रिहा न किए जाने पर उग्र आंदोलन किया जाए।
इसके खतरनाक परिणाम भुगतने के लिए सरकार तैयार रहे। उनका कहना था कि इन दोनों धर्मगुरुओं को जेल से छुड़ाने के लिए उसी तरह से उग्र आंदोलन होगा, जैसा आजादी की लड़ाई के समय शहीद भगत सिंह, राजगुरु ने असेंबली कांड किया था। उन्होंने यति नरसिम्हानंद और जितेंद्र नारायण त्यागी को धर्म योद्धा बताया। इस धर्म संसद से माघ मेले में आए कई बड़े लोगों ने माघ मेले में मौजूद बड़े संतों ने दूरी बनाए रखी।
संतों का कहना था कि प्रशासन के दबाव के बाद धर्म संसद का नाम बदलकर संत सम्मेलन करना पड़ा। इसलिए कि प्रशासन धर्म संसद की इजाजत नहीं दे रहा था। इसके बाद इसका नाम बदलकर संत सम्मेलन कर दिया। इस दौरान आयोजक आनंद स्वरूप ने दावा किया कि संत सम्मेलन के नाम से सिर्फ बैनर लगाया गया था जबकि हकीकत में यह धर्म संसद ही थी।