दीपपर्व की शुरूआत शुक्रवार को धनतेरस से हो रही है। पहले दिन लक्ष्मी-गणेश प्रतिमा की स्थापना के साथ सोना-चांदी के आभूषण, बर्तन समेत तमाम चीजों की खरीददारी करेंगे। । शाम को यम के निमित्त दीपदान होगा। कार्तिक त्रयोदशी तिथि बृहस्पतिवार की शाम 5:11 से आरंभ होकर शुक्रवार की शाम 6:17 तक रहेगी। अखिल भारतीय ज्योतिष परिषद के महामंत्री अविनाश राय के मुताबिक हस्त नक्षत्र का संचरण शुक्रवार की सुबह 6.48 बजे से हो रहा है। वैधृति योग रात 10:7 बजे तक रहेगा। शाम को 6.17 बजे पातालवासिनी भद्रा का उदय होगा। शुक्रवार का दिन, हस्त नक्षत्र के संयोग पर्व का पुण्य कई गुना अधिक बढ़ा रहा है।
लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा को ईशान कोण यानी उत्तर पूर्व में स्थापित करें। ज्योतिर्विद आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार लक्ष्मी जी की प्रतिमा को गणेश जी की प्रतिमा के दाहिने स्थापित करें। पुराने सिक्के और कौड़िया सामने रखें। घी का दीप प्रज्वलित कर देवी पधारने के लिए प्रार्थना करें।
धनतेरस पर खरीददारी का शुभ मुहूर्त शुक्रवार को दोपहर 1:48 से 3.20 बजे और शाम 6:26 से 8:23 बजे तक है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:40 से 12:40 बजे तक है।
स्थापना का मुहूर्त, पूजा विधि
गणेश-लक्ष्मी प्रतिमा को आसन देने का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त गोधूलि बेला है। अखिल भारतीय ज्योतिष परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री अविनाश राय के अनुसार पूजा स्थल को स्वच्छ करने के उपरांत चौकी रखें। उसे लाल और पीले रंग से सजाएं। पूजा के लिए तांबे के बर्तन का प्रयोग करें। पूजा की थाली में अक्षत (चावल) रोली (कुंकुम) हल्दी, दूर्वा, कपूर, पांच या सात कौड़ी रखें। लक्ष्मी गणेश पूजन में लाल, पीला हरा, सफेद रंग का सर्वाधिक प्रयोग शुभकारी है। लाल रंग शुभता, समृद्धि, पीला रंग सौम्यता, संपन्नता एवं आरोग्यता, हरा रंग परिवर्तन, खुशहाली और सफेद रंग शांति समृद्धि ऊर्जा प्रदान करने वाला है। जिन घरों में लोग अक्सर बीमार रहते हैं वे आरोग्यता के लिए धनवंतरि पूजा करें।
यम के निमित्त दीप दान का क्रम धनतेरस से शुरू होगा। घर में आंगन की नाली के पास सरसों के तेल का दीप जलेगा। जो रात भर जलता रहेगा। गोधूलि बेला में दीप घर के मुख्यद्वार पर दोनों तरफ दीपक अवश्य जलाएं इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होगा और घर-परिवार में सुख समृद्धि रहेगी। पूजा स्थल पर रात भर दीप जलाए। आंगन में जो दीप जलाए जाएं उसे रात भर जलते रहने दें।
शहर के आश्रमों में धनवंतरि पूजन किया जाएगा। श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की अगुवाई में धनवंतरि पूजन शाम सात बजे होगा। श्रीपंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के दारागंज स्थित आश्रम में धनवंतरि पूजा अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामसेवक गिरि की देखरेख में किया जाएगा।