इलाहाबाद हाईकोर्ट में डीजीपी ने ललितपुर के ट्रायल कोर्ट के जज को धमकी देने वाले एसपी बीके भोला से जुड़ी आधी-अधूरी जानकारी संग बुधवार को हलफनामा दाखिल किया। उसमें जिंदा होने व उनके खिलाफ की गई कार्रवाई से जुड़ी कोई जानकारी नहीं दी गई।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में डीजीपी ने ललितपुर के ट्रायल कोर्ट के जज को धमकी देने वाले एसपी बीके भोला से जुड़ी आधी-अधूरी जानकारी संग बुधवार को हलफनामा दाखिल किया। उसमें जिंदा होने व उनके खिलाफ की गई कार्रवाई से जुड़ी कोई जानकारी नहीं दी गई। बताया गया है कि भोला के बारे में पता किया जा रहा है।
विज्ञापन
कोर्ट ने 17 दिसंबर तक पूरी जानकारी संग फिर से हलफनामा दाखिल करने की मोहलत दी है। साथ ही चेतावनी भी दी है कि हलफनामा एसपी के स्तर से नीचे के अधिकारी का नहीं होना चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर, न्यायमूर्ति संजीव कुमार की खंडपीठ ने ललितपुर निवासी वृंदावन व 28 अन्य की आपराधिक अपील पर दिया है।
37 साल पुराने हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट के जज को धमकी देने वाले एसपी बीके भोला को लेकर पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने डीजीपी से हलफनामा तलब किया था। उनसे पूछा था कि जज को थाने में घसीटने की धमकी देने वाले तत्कालीन एसपी बीके भोला जिंदा हैं या नहीं, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
विज्ञापन
बुधवार को पेश हलफनामे डीजीपी ने केवल इतना ही बताया कि बीके भोला 1950 में जन्मे व 2009 में सेवानिवृत हुए। ट्रायल कोर्ट के आदेश के क्रम में की गई कार्रवाई की जानकारी इकट्ठा की जा रही है। ललितपुर के एसपी से एक सक्षम राजपत्रित अधिकारी को इस मामले के समन्वय के लिए नामित करने का अनुरोध किया गया है।
कोर्ट ने मांगी जानकारी
भोला जीवित हैं या नहीं।
यदि जीवित हों तो उनका पूरा पता, वर्तमान स्थिति और तैनाती का विवरण।
1988 में ट्रायल जज की ओर से की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश पर क्या कदम उठाए गए।