सावन के पवित्र महीने में श्रद्धालु बाबा काशी विश्वनाथ का जलाभिषेक करने के लिए प्रयागराज संगम से रवाना हुए। उन्होंने संगम के पवित्र जल को अपने पात्रों में भरा। यह एक प्राचीन और महत्वपूर्ण परंपरा है जिसका पालन भक्तगण हर साल करते हैं।
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श्रद्धालुओं ने 'हर हर महादेव' के जयकारे लगाए। इन जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। जयकारों के बीच उन्होंने श्रद्धापूर्वक जल संग्रह किया। भक्तों ने बताया कि वे प्रत्येक वर्ष सावन मास में यह यात्रा करते हैं। प्रयागराज से जल लेकर बाबा काशी विश्वनाथ को अर्पित करने की विशेष महत्ता है। यह अनुष्ठान उनकी गहरी आस्था और समर्पण को दर्शाता है। इस परंपरा के अनुसार, सावन में बाबा को जल प्रयागराज से ही चढ़ाया जाता है। यह यात्रा भक्तों के लिए आध्यात्मिक महत्व रखती है।
परंपरा का इतिहास
यह पवित्र परंपरा आदिगुरु शंकराचार्य ने शुरू की थी। उन्होंने इस अनुष्ठान को स्थापित किया था। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसका पालन आज भी बड़ी श्रद्धा के साथ किया जाता है।
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श्रद्धालुओं की आस्था
श्रद्धालु दूर-दूर से प्रयागराज संगम पहुंचते हैं। वे इस पवित्र जल को बाबा के चरणों में अर्पित करने के लिए आते हैं। यह यात्रा उनकी अटूट आस्था का प्रतीक है। भक्तगण पैदल चलकर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। वे मानते हैं कि इस जल से बाबा का अभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।