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पार्वती पति हर-हर महादेव

Tue, 08 Mar 2016 02:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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महाशिवरात्रि पर सोमवार को मनकामेश्वर मंदिर में दर्शन पूजन करते श्रद्घालु। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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फागुन कृष्णपक्ष चतुर्दशी महाशिवरात्रि पर सोमवार को देवाधिदेव महादेव के दर्शन, पूजन और अभिषेक को श्रद्धालुओं की आतुरता चरम पर रही। हर कोई उनका आशीष पाने को व्याकुल दिखा। भगवान शंकर के दर्शन पूजन को निकले श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा शहर शिवमय हो गया। शिवालयों में रुद्राभिषेक हुआ। अनेक संस्थाओं की ओर से भोलेनाथ की बरात निकाली गई। ठंडई प्रसाद वितरित किया गया। वहीं माघ मेला के अंतिम स्नान पर्व पर गंगास्नान के लिए संगम समेत विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। ‘हर-हर, बम-बम’ के जयघोष के साथ गंगा स्नान के बाद भक्तों की भारी भीड़ भोलेनाथ के दर्शन को शिवालयों में उमड़ी।
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सरस्वती घाट स्थित मनकामेश्वर मंदिर में रात एक बजे से भोले भंडारी के पूजन अर्चन के लिए शिव भक्तोें का तांता लगा। सोमवार सुबह चार बजे  घंटा घड़ियाल, ढोल मंजीरा शंखनाद के बीच मंदिर के व्यवस्थापक स्वामी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी ने मंगला आरती की। आचार्य पुरोहितों के आचार्यत्व में विधिविधान से पूजन किया। ‘पार्वती पति हर-हर महादेव’ ‘भोले नाथ सबके साथ’ का जयकारा लगा। घंटों से इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं का रेला मंदिर गर्भगृह में प्रवेश कर गया। आतुर भक्तों ने भोलेनाथ का गंगाजल से अभिषेक किया। बेल पत्र, दूध, गंगाजल, धूप, दीप, अक्षत, माला, फूल, दूर्वा, भांग, नैवेद्य से शिवार्चन किया गया। भोलेनाथ का पूजन अर्चन स्पर्श कर श्रद्धालु उनकी कृपा पाने को आतुर रहे। भीड़ का सबसे अधिक दबाव सुबह चार बजे से नौ बजे तक रहा। मंदिर से लेकर बोट क्लब और सरस्वती घाट तक कतार लगी। व्यवस्था में लगे प्रवीण नौटियाल, मनोज गौतम, सुशील तिवारी और  पुलिस के जवानों को अनुशासन बनाए रखने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। रात दस बजे सोने चांदी के आभूषणों से भोलेनाथ का शृंगार हुआ। उसके बाद आचार्य विद्याकांत पांडेय, रामचंद्र शुक्ला, आलोक त्रिपाठी, मनोज, राधेश्याम अवस्थी द्वारा चार पहर का अभिषेक आरंभ हुआ, जो पूरी रात चला। अनुष्ठान पूर्णता मंगलवार की सुबह मंगलाआरती से होगी।

वहीं शहर के अन्य मंदिरों और शिवालयों में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। दारांगज बक्शी कला स्थित नागवासुकी मंदिर, हाटकेश्वर महादेव, पंचमुखी महादेव, कोटेश्वर महादेव, कमौरी महादेव, सोमेश्वर महादेव, शिव कचहरी, ब्रह्ममेश्वर महादेव, पीला शिवाला, भोले गिरि महादेव मंदिर, हाईकोर्ट चौराहा स्थित हनुमान मंदिर, सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन आदि में देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। बिजली की बहुरंगी रोशनी से शिवालय जगमगाते रहे। छोटे बड़े सभी शिवालयों में देर रात तक पूजन अर्चन होता रहा।
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दरियाबाद स्थित तक्षकेश्वर महादेव मंदिर में पीठाधीश्वर रविशंकर की देखरेख में विशेष अनुष्ठान पूजन हुआ। भोलेनाथ का शंख, कौड़ियों से अनूठा शृंगार भक्तों का मनमोहता रहा। मंदिर परिसर में प्रसाद एवं हवन सामग्री की व्यवस्था कराई गई थी। चार पहर के विशेष पूजन में शिव शक्ति, दशमहाविद्या की पूजा की गई। भोर से शुरू हुआ जलाभिषेक का क्रम शृंगार होने तक अनवरत चलता रहा।

त्रिवेणी बांध स्थित आदिशंकर विमान मंडपम मंदिर में व्यवस्थापक रमणी शास्त्री की देखरेख में रुद्राभिषेक शिवशक्ति सहत्रार्चन हुआ। श्रद्धालुओं ने सामूहिक अभिषेक पूजन किया। सुबह आठ बजे से शुरू हुआ अभिषेक का क्रम शाम तक चलता रहा।

नेपाली समाज के लोगों ने गंगानगर राजापुर स्थित शिव मंदिर में अपनी परंपरानुसार पूजा अर्चना की। नेपाली धर्म समाज की ओर से आयोजित पूजा समारोह हरी बहादुर की देखरेख में संपन्न हुआ। महिलाओं ने भजन कीर्तन कर पशुपतिनाथ की महिमा का गुणगान किया।
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