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डीएनए रिपोर्ट के बावजूद बच्ची मां-बाप से दूर

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प्रयागराज। हैदराबाद में पश ुचिकित्सक की दुष्कर्म के बाद हत्या की वारदात से यह बात साबित होती है कि आज भी महिलाओें को लेकर तमाम जगहों पर लोगों की सोच का दायरा बेहद संकीर्ण है। वैसे इसका अंदाजा पिछले साल शहर में हुई एक अन्य घटना से भी लगाया जा सकता है। जिसमें एक मासूम को खुद उसके ही मां-बाप ने इसलिए ठुकरा दिया था कि वह बच्ची है। हालांकि डीएनए रिपोर्ट से उसकी पहचान स्पष्ट हो गई है लेकिन अब भी वह गुमनामों की तरह जिंदगी जीने को मजबूर है। जिम्मेदारा विभागों की ओर से इस संबंध में अब तक कोई पहल भी नहीं की गई है।
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कुंडा कोतवाली के सहिबापुर पहाड़पुर बनोही के शिक्षामित्र विनोद कुमार की पत्नी प्रीती ने 16 नवंबर 2018 को कुंडा सीएचसी में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। तबियत खराब होने पर उन्हें चिल्ड्रेन रेफर किया गया। जहां 17 नवंबर को एक शिशु की मौत हो गई। इस बीच विनोद की बहन राजकली आईसीयू में गई तो उसने आरोप लगाया कि बेटे की जगह बेटी को रख दिया गया। अस्पताल स्टाफ का कहना था कि उन्होंने बेटी को ही भर्ती कराया। जबकि परिजनों का कहना था सीएचसी स्टाफ ने उन्हेें जुड़वा बेटे होने की बात बताई थी। साथ ही उनकी तस्वीर भी दिखाई। विनोद ने इस मामले में रिपोर्ट भी दर्ज कराई। जिसके बाद पुलिस ने मामले में डीएनए जंाच का सहारा लिया। पिछले दिनों डीएनए रिपोर्ट आने के बाद साफ हो गया कि बच्ची का पिता विनोद ही है। उधर रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से ही बच्ची राजकीय बाल गृह में है। हालांकि डीएनए रिपोर्ट आने के बाद भी वह अपने माता-पिता के पास नहीं पहुंच सकी है। इस मामले में विनोद का कहना है कि उसे अब तक बच्ची नहीं मिल सकी है। जबकि मामले में कर्नलगंज इंस्पेक्टर का कहना है कि बच्ची बाल गृह से ही मां-बाप को मिलेगी। बाल गृह की ओर से मांगे जाने पर डीएनए रिपोर्ट उसे उपलब्ध कराई जाएगी। उधर बाल गृह प्रबंधन का कहना है कि अब तक बच्ची के लिए उनसे किसी ने संपर्क नहीं किया है।
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