फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लोकतंत्रवाद को परिभाषित करता है डॉ. अंबेडकर का राष्ट्रवाद

Thu, 14 Apr 2016 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
डा. भीमराव अंबेडकर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
डॉ. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती की पूर्व संध्या पर विभिन्न संगठनों और संस्थानों की ओर से कार्यक्रम आयोजित किए गए। इलाहाबाद संग्रहालय में ‘डॉ. अंबेडकर और राष्ट्रवाद’ पर परिसंवाद आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के डॉ. भूरे लाल ने कहा कि डॉ. अंबेडकर राष्ट्रवादी नहीं बल्कि लोकतंत्रवादी थे। उनका राष्ट्रवाद लोकतंत्रवाद को परिभाषित करता है। उत्तर मध्य रेलवे के वेद प्रकाश ने कहा कि डॉ. अंबेडकर एक राष्ट्रवादी विचारक थे।
विज्ञापन


अशोक कुमार ने उन्हें भारतीय बताया और कहा कि डॉ. अंबेडकर कहते थे कि लोग भले ही अपने को जाति, धर्म से परिभाषित करें, मैं तो अपने को भारतीय ही कहूंगा। कार्यक्रम अध्यक्ष राजेश पुरोहित ने कहा कि आज जरूरत संकीर्णताओं से उठकर देश को सुदृढ़ करने की है न कि छोटे-छोटे मुद्दों को लेकर संघर्ष करने की है। संचालन डॉ. ओए वानखेड़े और आभार ज्ञापन डॉ. राजेश मिश्र ने किया।  

राष्ट्रीय युवा क्रांतिकारी मोर्चा की ओर से हाईकोर्ट चौराहे पर डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा को दूध से नहलाकर माल्यार्पण किया। दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। जिलाध्यक्ष सुनील वर्मा ने कहा कि डॉ. भीमराव का जीवन संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा में समर्पित कर दिया। महानगर अध्यक्ष राकेश कुमार ने बताया कि डॉ. अंबेडकर ने कहा था कि समाजवाद के बिना दलितों को आर्थिक तंगी से मुक्ति नहीं मिल सकती। इस दौरान अतुल खन्ना, अतुल तिवारी, सुनील वर्मा, राकेश, चंद्रबलि सरोज, संपत लाल भारतीय, रंजीत, विजय गौड़ आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें