माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती से मिलने पहुंचा नेपाल का प्रतिनिधि मंडल।
- फोटो : अमर उजाला।
संगम की रेती पर आयोजित माघ मेले का मंच अब केवल भक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्र और धर्म से जुड़े गंभीर वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श का केंद्र भी बन गया है। इस वर्ष माघ मेले में पड़ोसी देश नेपाल को पुनः हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग प्रमुखता से गूंजी है। नेपाल से आए श्रद्धालुओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने स्वामी नरेंद्रानंद से नेपाल की पुरानी हिंदू पहचान को वापस दिलाने के लिए मार्गदर्शन और आशीर्वाद भी मांगा है।
श्रद्धालुओं ने स्वामी नरेंद्रानंद के समक्ष नेपाल में वर्तमान धार्मिक और सांस्कृतिक चुनौतियों को विस्तार से रखा। कहा गया कि नेपाल जो कभी विश्व का एकमात्र हिंदू राष्ट्र था उसी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान के साथ पुनः उसे हिंदू राष्ट्र के रूप में स्थापित किया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि नेपाल में अवैध रूप से रोहिंग्या मुस्लिमों की घुसपैठ बढ़ रही है। इसके साथ ही, देश में हजारों की संख्या में मस्जिदें और चर्च बनाए जा रहे हैं, जो संगठित धर्मांतरण का संकेत है। चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया कि हिंदू भगाओ, देश बचाओ जैसे विवादास्पद नारों के कारण नेपाल के मूल हिंदू निवासियों में भय का माहौल उत्पन्न हो गया है।
स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने नेपाल से आए राम पुकार यादव, राखी ठाकुर और राजेंद्र खनाल आदि की बातों को ध्यान से सुना। उन्होंने नेपाल की हिंदू पहचान की सुरक्षा को अत्यंत आवश्यक बताते हुए इस अभियान में अपने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने भारत और नेपाल के सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को भी रेखांकित किया। नेपाली प्रतिनिधिमंडल ने माघ मेले के संतों का आशीर्वाद लेकर नेपाल लौटने और वहां एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का संकल्प लिया है। उनकी रणनीति है कि वे नेपाल में गांव-गांव जाकर लोगों को नेपाल को पुनः हिंदू राष्ट्र बनाने की आवश्यकता के बारे में जागरूक करेंगे।