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विकास दुबे एनकाउंटर की न्यायिक जांच कराने की मांग, हाईकोर्ट के अधिवक्ता ने मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र

Sat, 11 Jul 2020 07:25 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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vikas dubey - फोटो : अमर उजाला
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आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपी विकास दुबे के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने की घटना की न्यायिक जांच की मांग की गई है। हाईकोर्ट के अधिवक्ता विशेष राजवंशी ने मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर को पत्र लिखकर कहा है कि विकास दुबे को उज्जैन से कानपुर लाते समय 10 जुलाई की सुबह यूपी एसटीएफ ने मार दिया। इस घटना को मुठभेड़ बताया जा रहा है।

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मांग की गई है कि मुख्य न्यायाधीश मामले का स्वत: संज्ञान लेकर राज्य सरकार को घटना की न्यायिक जांच का आदेश दें। इसी प्रकार के दो पत्र हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के महासचिव प्रभाशंकर मिश्र भी मुख्य न्यायाधीश को लिख चुके हैं। कहा गया है कि मामले की निष्पक्ष जांच से आम जनता का न्यायिक प्रक्रिया में भरोसा कायम रह सकता है। 

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
अधिवक्ता विशेष राजवंशी ने पत्र में कहा है कि वह एक अधिवक्ता होने के कारण इस घटना को लेकर हो रही बदनामी तथा अपमान की वजह से चीफ जस्टिस को लिख रहे है ।

 इस पत्र में भारतीय संविधान के अ़नुच्छेद 14, 20, 21 व 39 ए का उल्लेख  करते हुए कहा गया है कि ये सारे  अनुच्छेद देश के प्रत्येक नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए है । कहा, कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। पहले से ही लोग आशंका जाहिर कर रहे थे कि  पुलिस विकास को पकड़कर एनकाउंटर कर देगी, जो सही निकली ।
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डेमो - फोटो : डेमो
अधिवक्ता ने कहा है कि एनकाउंटर की सत्यता अभी भी अज्ञात है । इसकी विभागीय  जांच  से  निष्पक्ष जांच संभव नहीं है, क्योंकि पुलिस ने स्वयं ही उसे दोषी मानकर उसके साथ न्याय कर दिया है। ऐसे में अधिवक्ता ने कहा है कि वह एक वकील के रूप में न्याय प्रक्रिया का माखौल होता  हुआ देखकर अपने को असहज महसूस कर रहे हैं । पुलिस की ओर से की गई इस प्रकार की कार्रवाई अगर दंडविहीन रह जाती है तो देश का प्रत्येक नागरिक भयभीत महसूस करता  रहेगा।
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