अधिवक्ता विशेष राजवंशी ने पत्र में कहा है कि वह एक अधिवक्ता होने के कारण इस घटना को लेकर हो रही बदनामी तथा अपमान की वजह से चीफ जस्टिस को लिख रहे है ।
इस पत्र में भारतीय संविधान के अ़नुच्छेद 14, 20, 21 व 39 ए का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि ये सारे अनुच्छेद देश के प्रत्येक नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए है । कहा, कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। पहले से ही लोग आशंका जाहिर कर रहे थे कि पुलिस विकास को पकड़कर एनकाउंटर कर देगी, जो सही निकली ।
अधिवक्ता ने कहा है कि एनकाउंटर की सत्यता अभी भी अज्ञात है । इसकी विभागीय जांच से निष्पक्ष जांच संभव नहीं है, क्योंकि पुलिस ने स्वयं ही उसे दोषी मानकर उसके साथ न्याय कर दिया है। ऐसे में अधिवक्ता ने कहा है कि वह एक वकील के रूप में न्याय प्रक्रिया का माखौल होता हुआ देखकर अपने को असहज महसूस कर रहे हैं । पुलिस की ओर से की गई इस प्रकार की कार्रवाई अगर दंडविहीन रह जाती है तो देश का प्रत्येक नागरिक भयभीत महसूस करता रहेगा।