इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 45 साल पुराने जमीन के एक विवाद में स्थगन आदेश हासिल कर मुकदमे को दशकों तक लंबित रखने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 45 साल पुराने जमीन के एक विवाद में स्थगन आदेश हासिल कर मुकदमे को दशकों तक लंबित रखने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की अदालत ने बलिया निवासी शेख मोहम्मद मुर्तजा की द्वितीय अपील खारिज कर दी।
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मामला बलिया जनपद निवासी शेख वाजिद अली और शेख मोहम्मद मुर्तजा के बीच जमीन पर कब्जे का है। ट्रायल कोर्ट ने 1979 में वाजिद अली के पक्ष में फैसला दिया था। इसके खिलाफ प्रतिवादी मोहम्मद मुर्तजा की पहली अपील 1980 में जिला जज कोर्ट से खारिज हो गई। इसके बाद उन्हाेंने हाईकोर्ट में दूसरी अपील दाखिल की लेकिन 1980 से अब तक तक वह यह बताने में विफल रहे कि आखिर वह विधि के किस महत्वपूर्ण बिंदु पर सुनवाई चाहते हैं। कोर्ट ने यह भी पाया कि ट्रायल कोर्ट ने खतौनी, मानचित्र और गवाहों के आधार पर जमीन का सही मालिक व कब्जाधारी तय किया था।
कोर्ट की टिप्पणी
दशकों तक केवल अंतरिम आदेश का फायदा लेकर मुकदमा लटकाना सरासर गलत है। इससे न्याय में देरी होती है। इससे न सिर्फ पक्षकार को बल्कि मुकदमे को भी नुकसान होता है - हाईकोर्ट