Defaulter hospital list in Ayushman Yojna
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प्रयागराज। आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों के इलाज में आनाकानी करने वाले 35 सूचीबद्ध निजी अस्पताल जांच के दायरे में आ गए हैं। इन अस्पतालों में बीते छह महीने में सिर्फ से एक से तीन मरीजों का इलाज किया गया। कई ऐसे भी हॉस्पिटल हैं, जहां दो महीने से एक भी लाभार्थी मरीज का इलाज नहीं किया गया। तीन नोटिस के बाद इन अस्पतालों को भी काली सूची में डालने की तैयारी है। साफ है कि 21 अस्पतालों को पैनल से बाहर करने के बाद अब आयुष्मान योजना में डिफाल्टर निजी अस्पतालों की सूची और लंबी होगी।
सीएमओ मेजर डॉ. जीएस बाजपेयी ने जांच और नोटिस के बाद 21 निजी अस्पतालों को काली सूची में डालकर शासन को योजना से उनकी संबद्धता समाप्त करने की संस्तुति की है। अब जांच के दायरे में ऐसे अस्पतालों को चिह्नित किया गया है, जो पैनल मेें बने रहने के लिए आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी मरीजों को सिर्फ खानापूरी के लिए भर्ती कर रहे हैं।
शासन के निर्देश पर आयुष्मान पैनल में शामिल निजी अस्पतालों की जांच में पाया गया कि कई अस्पतालों ने गंभीर रोगों के इलाज में लाभार्थियों को भर्ती करने में आनाकानी की गई। कई अस्पतालों ने नोटिस का जवाब तक नहीं दिया। जुलाई की केस रिपोर्ट आने के बाद चिह्नित अस्पतालों को काली सूची में डालकर पैनल से बाहर कराने की कार्रवाई की जाएगी।
आयुष्मान भारत पीएमजेएसवाई योजना के लाभार्थियों का नि:शुल्क उपचार न करने वाले 35 निजी अस्पतालों की जांच की जा रही है। खामियां मिली हैं, मानक के मुताबिक सुधार न होने पर उन्हें पैनल से बाहर किया जाएगा। - डॉ. राहुल सिंह, नोडल अधिकारी आयुष्मान भारत योजना