कमजोर प्रदर्शन के नाम पर 50 वर्ष की उम्र पार कर चुके राज्य कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने के फरमान का विरोध तेज हो गया है। कर्मचारियों ने प्रदेश व्यापी आंदोलन की घोषणा की है। उत्तर प्रदेश कर्मचारी महासंघ के बैनर तले आंदोलन के पहले चरण में जिला, तहसील और ब्लाक स्तर पर धरना-प्रदर्शन और जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। 30 सितंबर तक चलने वाले इस अभियान के दौरान यदि किसी कर्मचारी को बाहर किया गया तो आंदोलन तेज हो जाएगा। प्रदेश नेतृत्व की ओर से रविवार को इस बाबत शासन को प्रत्यावेदन भी सौंपा गया।
मुख्य सचिव राजीव कुमार की ओर से जारी शासनादेश में सभी विभागों से अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने वाले कर्मचारियों की सूची 31 जुलाई तक मांगी गई है। अकेले इलाहाबाद में 10 हजार राज्य कर्मचारी इस दायरे में आ रहे हैं। इससे विभागों में हड़कंप मचा हुआ है और कर्मचारियाें में नाराजगी है। 32 सूत्रीय मांग को लेकर महासंघ के प्रांतीय कार्यकारिणी की लखनऊ में रविवार को पहले से बैठक प्रस्तावित थी लेकिन उसमें यही मुद्दा छाया रहा। कर्मचारी नेताओं ने घोषणा की कि सरकार के इस आदेश को लागू नहीं होने दिया जाएगा। हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।
चूंकि, किसी भी कर्मचारी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने से तीन महीने पहले नोटिस देना होगा। इसके मद्देनजर बैठक में आंदोलन के पहले चरण में जिला, तहसील स्तर पर विरोध प्रदर्शन, गेट मीटिंग, जागरूकता अभियान चलाए जाने का निर्णय लिया गया। महासंघ के जिलाध्यक्ष नरसिंह ने बताया कि यह अभियान 30 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान यदि किसी कर्मचारी को निकालने की कोशिश की गई तो तीव्र विरोध होगा। इसके बाद तीन अक्तूबर को लखनऊ में कर्मचारियों का जमावड़ा होगा। यदि सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया तो आगे के आंदोलन की घोषणा की जाएगी, जो पहले से ज्यादा आक्रामक होगा। इसी क्रम में सोमवार को कलेक्ट्रेट और विकास भवन में राज्य कर्मचारियों की बैठक होगी। उसमें प्रदेश स्तर पर तय कार्यक्रम के अनुसार आंदोलन की घोषणा की जाएगी।
कमजोर प्रदर्शन के नाम पर 50 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मचारियाें को बाहर का रास्ता दिखाया गया तो उन्हें कई स्तर पर नुकसान होगा। अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामले में कर्मचारी की आगे की सेवा नहीं जुड़ती। ऐसे में उन्हें नौकरी से वंचित होने के साथ पेंशन और ग्रेच्युटी के रूप में बड़ा नुकसान होगा। कई कर्मचारी तो पेंशन से भी वंचित हो जाएंगे। चूंकि पेंशन के लिए 20 साल की सेवा अनिवार्य है। इसके विपरीत 30 साल से अधिक उम्र में नौकरी पाने वाले कर्मचारी बाहर हुए तो उन्हें पेंशन नहीं मिलेगी।
जिला प्रशासन में कर्मचारियों के पटल परिवर्तन का दौर भी शुरू हो गया है। 43 कर्मचारियों को इधर से उधर किया गया है। तबादला वाले कर्मचारियों की सूची रविवार को जारी कर दी गई। हालांकि, डीएम का आदेश 30 जून का है। पूर्व की तारीख में तबादला का आरोप लगाते हुए कर्मचारियों ने नाराजगी भी व्यक्त की है। सूची में शामिल कई कर्मचारियोंका कलेक्ट्रेट में ही पटल परिवर्तन किया गया है। वहीं कुछ को हंडिया, कोरांव आदि तहसीलों में भेजा गया है। तहसील में नियुक्त कई कर्मचारियों को कलेक्ट्रेट में तैनाती दी गई है। सरकार की नई नीति के अंतर्गत प्रमोशन, कर्मचारियों की मांग, जनहित तथा कार्यहित में स्थानांतरण किया गया है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कमजोर प्रदर्शन के नाम पर 50 वर्ष की उम्र पार कर चुके कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने के आदेश का स्वागत किया है। एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि विभागों में तय समय में काम पूरा करने तथा उसकी गुणवत्ता के लिए यह उचित निर्णय है।