आबकारी आयुक्त और प्रमुख सचिव आबकारी गुरुवार को 15 दिन से बंद शराब की 2935 दुकानों के बारे में फैसला करेंगे। इन दुकानों को हाईवे से 500 मीटर की परिधि में होने के कारण सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हटा दिया गया था। अभी हाल में सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेकर 20 हजार या उससे कम आबादी वाले इलाकों में 220 मीटर के बाद दुकान खोलने के आदेश हो गए है। ये दुकानें पूरी साल बंद रहीं तो प्रदेश सरकार को तीन हजार करोड़ के राजस्व की क्षति होगी। इस आदेश के बाद कितनी दुकान शिफ्ट हो जाएंगी और उनसे कितना राजस्व मिलेगा। इस रिपोर्ट के साथ इलाहाबाद सहित प्रदेश के 36 जिलों के आबकारी अधिकारी लखनऊ बुलाए गए हैं।
विभाग को साल में मिलने वाले राजस्व का 20 फीसदी राजस्व कम होने की जानकारी से शासन में खलबली मची हुई है। अब शासन ने बंद हुईं इन दुकानों को दूसरे स्थानों पर 15 मई तक शिफ्ट कराने के निर्देश जिलाधिकारी और आबकारी अधिकारियों को दिए हैं। दुकान बंदी के इस आदेश का असर गोरखपुर, आगरा, बरेली, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, मेरठ, इलाहाबाद, सहित 36 जिलों के आबकारी विभाग पर पड़ा है।
अपर आयुक्त आबकारी राम सागर तिवारी ने बताया कि राजस्व तो गिरा है लेकिन शराब की दुकानों को शिफ्ट कराने के बारे में कुछ नियमों का सरलीकरण कर दिया है। दुकानों को शिफ्ट कराने के बारे में गुरुवार को लखनऊ में प्रस्तावित बैठक अहम होगी।
हाईवे से शराब की दुकानों के आदेश से इलाहाबाद की 39 दुकानें बंद हो गईं हैं। इनमें से नौ दुकानों को पहले ही लाइसेंसियों ने सरेंडर कर दिया है। जिले में शराब की 225 दुकानें थीं, इनमें से अब तक तमाम प्रयासों से 186 दुकान ही इस वित्तीय वर्ष में खुल पाईं हैं। डीएम संजय कुमार ने इन दुकानों को शिफ्ट कराने के बारे में प्रयास किए लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली। अब नए सिरे से कवायद की जाएगी।