‘खाने को हो गया था मोहताज’
एसीपी दारागंज आस्था जायसवाल के मुताबिक, पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पहले श्यामजी की गाड़ी चलाता था। उसने वर्ष 2019 में उसे 11 लाख में एक पिकअप लोन पर दिलवा दी। तब भरोसा दिलाया था कि किश्त अदा करने में वह उसका सहयोग करेगा, लेकिन बाद में वह अपने वादे से मुकर गया। उसे काम देना भी बंद कर दिया। इसके चलते वह किश्त नहीं अदा कर पाया और बैंक ने गाड़ी खींच ली। इससे पहले कई महीनों की किश्त उसने ब्याज पर उधार रुपये लेकर भरीं। इससे उस पर कर्ज और भी बढ़ गया। हालत यह हो गई कि खाने तक को मोहताज हो गया। एसीपी के मुताबिक, आरोपी ने यह भी बताया कि श्याम जी अक्सर उसके घर पर आया-जाया करता था। ऐसे में उसे पत्नी से अवैध संबंध का भी शक था।
एक घंटे पहले ही आ गया था
आरोपी ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि घटना वाली रात वह चार बजे के करीब ही मौके पर पहुंच गया था। उसने पड़ोस के ही श्रीकुमार शुक्ला से तमंचा लिया था। उसे मालूम था कि पिकअप से सब्जी उतारने के दौरान अक्सर श्यामजी गाड़ी में ही बैठ जाता था। ऐसे में वह सीधे गाड़ी के पास पहुंचा। उस वक्त श्यामजी हल्की नींद में था और इसी दौरान वह उसे गोली मारकर भाग निकला। पुलिस ने बताया कि वह घटना के बाद घूरपुर स्थित एक रिश्तेदार के घर भाग गया था। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
थाने के पास हुई थी घटना
31 दिसंबर को घटना दारागंज थाने के पास हुई थी। झूंसी के इसीपुर मलावा निवासी श्यामजी मंडी से आलू लेकर गंगामूर्ति चौराहे के पास स्थित गोदाम पर पहुंचा था। पिकअप से आलू की बोरियां उतारे जाने के दौरान वह गाड़ी में ही ड्राइवर के बगल वाली सीट पर बैठा था, तभी गोली माकर उसकी हत्या कर दी गई थी।