prayagraj news : गंगा में मिले शव का अंतिम संस्कार करते नगर निगम के जोनल अधिकारी नीरज कुमार सिंह।
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बताते हैं कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में बीते अप्रैल, मई महीने के दौरान जब फाफामऊ श्मशान घाट पर शवों जलाने के लिए जगह नहीं मिल रही थी और लकड़ी, कर्मकांड के नाम पर मनमाना वसूली की जा रही थी, तभी से नीरज वहां शव लेकर आने वालों की मदद के लिए आगे आ गए थे। तब नीरज ने उन दिनों 12 ऐसे शवों का अंतिम संस्कार खुद किया, जिनके शवों को घाट पर लावारिस छोड़कर लोग चले गए थे। इसी दौरान रेत में दबाए गए कुछ शवों के बाहर दिखने की जानकारी मिलने के बाद योगी सरकार ने ऐसे लावारिस शवों का सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कराने का निर्देश दिया था।
prayagraj news : गंगा में मिले लावारिश शवों का अंतिम संस्कार।
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तब नगर आयुक्त ने यह जिम्मेदारी जोनल अफसर नीरज को सौंप दी। संक्रमण फैलने के डर को नकार कर उन्होंने शवों को जलाने की चुनौती स्वीकार कर ली। लोग जहां एक शव को जलाने में घंटों वक्त लगने पर थक जाते हैं और फिर घर आकर स्नान के बाद शरीर को पवित्र किया जाता है, वहीं इस अफसर ने बिना रुके एक दिन में कभी 22 तो कभी 24 और कभी 39 शवों को मुखाग्नि देने का रिकार्ड बनाया। उन्होंने ऐसे गुमनाम शवों के साथ खून जैसा रिश्ता जोड़ा। वे श्राद्ध के बाद चंदन की लकड़ी, घी चिताओं पर रखरकर परिक्रमा करते थे। हर शव के लिए कफन और रामनामी ओढ़ाकर पूरे रीति रिवाज के साथ उन्होंने लगातार महीने भर में 167 शवों को मुखाग्नि दी। बाढ़ आने से पहले इस घाट पर कोई भी लावारिस शव बिना अंतिम संस्कार के नहीं रहा।